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विश्लेषण :भारत के हवाई अड्डों पर तुर्की कंपनी की सुरक्षा जिम्मेदारी: क्या यह चिंता का विषय है?

ByBinod Anand

May 15, 2025

 

ह एक विडंबनापूर्ण और चिंताजनक स्थिति है कि जिस तुर्की ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान को सैन्य सहायता प्रदान की, उसी देश की एक कंपनी आज भारत के कई महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों को संभाल रही है। Celibi Aviation नामक तुर्की कंपनी की सहायक कंपनियां दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत आठ भारतीय हवाई अड्डों पर कार्गो हैंडलिंग से लेकर एयरसाइड ऑपरेशंस जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यह तथ्य तब और अधिक असहज करने वाला हो जाता है जब हम यह याद करते हैं कि तुर्की ने न केवल पाकिस्तान को सशस्त्र ड्रोन मुहैया कराए, बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए ऑपरेटर भी भेजे, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह भारत के विरुद्ध किसी भी संभावित कार्रवाई में पाकिस्तान के साथ खड़ा है।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रत्युत्तर में, जब भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया, तो तुर्की का रवैया स्पष्ट रूप से भारत विरोधी रहा। ऐसे संवेदनशील समय में, एक ऐसे देश की कंपनी का भारतीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
Celibi Aviation भारत में सालाना 58,000 से अधिक उड़ानों का प्रबंधन करती है और इसके लगभग 7,800 कर्मचारी ग्राउंड हैंडलिंग, कार्गो प्रबंधन और एयरसाइड ऑपरेशंस जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल हैं।

ये सभी कार्य हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। कंपनी के कर्मचारी एयरसाइड ज़ोन में काम करते हैं, जो हवाई अड्डों के उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र हैं और जहां विमानों की सीधी आवाजाही होती है। इसके अतिरिक्त, वे कार्गो लॉजिस्टिक्स और यात्रियों के सामान को भी संभालते हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का सामान भी शामिल है। ऐसे में, एक ऐसे देश की कंपनी के कर्मचारियों का इन संवेदनशील क्षेत्रों तक निर्बाध पहुंच होना, जिसके राजनीतिक और सैन्य संबंध भारत के साथ तनावपूर्ण रहे हैं, निश्चित रूप से सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।

भारत ने 2023 में तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान ‘ऑपरेशन दोस्त’ चलाकर मानवीय सहायता प्रदान की थी। भारत की इस सद्भावना के बावजूद, तुर्की का पाकिस्तान के प्रति लगातार झुकाव और सैन्य सहायता प्रदान करना एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यह ज्ञात होता है कि तुर्की ने न केवल ड्रोन दिए, बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए विशेषज्ञ भी भेजे, जो भारत पर हमले में सहायता करने के समान है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान के नेतृत्व में तुर्की ने एक स्पष्ट इस्लामी रुख अपनाया है और कश्मीर मुद्दे पर हमेशा पाकिस्तान का समर्थन किया है।

अब सवाल यह उठता है कि जिस देश ने भारत के विरुद्ध ऐसे शत्रुतापूर्ण रवैये का प्रदर्शन किया है, उसकी कंपनी को भारत के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर सुरक्षा संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी सौंपना कहाँ तक उचित है? क्या यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता नहीं है?

भारतीय व्यापारियों द्वारा तुर्की से सेब और अन्य सामानों का आयात बंद करने का निर्णय एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। यह दर्शाता है कि भारतीय समाज तुर्की के भारत विरोधी रुख से क्षुब्ध है और आर्थिक स्तर पर भी इसका विरोध कर रहा है। ऐसे माहौल में, सरकार को भी इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

भारत सरकार को सभी तुर्की कंपनियों के साथ व्यापारिक संबंधों और भारत में उन्हें दिए गए कार्यों की समीक्षा करनी चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी ऐसे देश की कंपनी को संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जिसके हित भारत के विपरीत हों।

यह तर्क दिया जा सकता है कि Celibi Aviation एक व्यावसायिक इकाई है और इसके कार्यों को तुर्की सरकार के राजनीतिक निर्णयों से अलग देखा जाना चाहिए। हालांकि, यह तर्क पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है। किसी भी देश की कंपनी, खासकर जो सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम कर रही हो, उस देश की सरकार के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकती। भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में, ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल अपने देश के हितों को साधने के लिए किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, हवाई अड्डों पर काम करने वाले कर्मचारियों की पृष्ठभूमि और उनकी निष्ठा भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। क्या यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि Celibi Aviation के कर्मचारी पूरी तरह से भारतीय कानूनों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति निष्ठावान हैं और उन पर किसी बाहरी दबाव या प्रभाव का कोई असर नहीं होगा?

भारत सरकार को इस मामले में निम्नलिखित कदम उठाने पर विचार करना चाहिए:

* तत्काल समीक्षा: भारतीय हवाई अड्डों पर Celibi Aviation और अन्य तुर्की कंपनियों के कार्यों की गहन समीक्षा की जानी चाहिए। इस समीक्षा में उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रकृति, सुरक्षा प्रोटोकॉल का अनुपालन और संभावित सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया जाना चाहिए।

* सुरक्षा ऑडिट: हवाई अड्डों पर Celibi Aviation द्वारा संभाले जा रहे संवेदनशील क्षेत्रों का एक विस्तृत सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। यह ऑडिट स्वतंत्र सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए ताकि किसी भी संभावित भेद्यता का पता लगाया जा सके।

* कर्मचारी पृष्ठभूमि की जांच: Celibi Aviation के सभी कर्मचारियों की गहन पृष्ठभूमि जांच की जानी चाहिए, खासकर उन कर्मचारियों की जो उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में काम करते हैं। उनकी निष्ठा और संभावित बाहरी संपर्कों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

* विकल्पों की तलाश: यदि समीक्षा और ऑडिट में सुरक्षा जोखिम पाए जाते हैं, तो सरकार को Celibi Aviation के विकल्प तलाशने शुरू कर देने चाहिए। भारतीय कंपनियों को इन संवेदनशील कार्यों को संभालने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

* स्पष्ट नीति: भविष्य में, उन देशों की कंपनियों को भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देने के संबंध में एक स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए जिनके साथ भारत के राजनीतिक या सुरक्षा संबंध तनावपूर्ण हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी व्यावसायिक हित से ऊपर रखा जाना चाहिए।

यह सच है कि Celibi Aviation 2008 से भारत में काम कर रही है और इसने भारतीय विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। हालांकि, भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव और एक विशेष देश के शत्रुतापूर्ण रवैये को देखते हुए, अतीत के व्यावसायिक संबंधों को बनाए रखना बुद्धिमानी नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है।

भारतीय हवाई अड्डे देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना का हिस्सा हैं और इनकी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। सरकार को इस मामले में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत के हवाई अड्डे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और किसी भी बाहरी खतरे से मुक्त हैं।

व्यापार और वाणिज्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। जिस तुर्की ने भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का समर्थन किया है, उसकी कंपनी को भारत के संवेदनशील हवाई अड्डों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपना एक ऐसा जोखिम है जिसे भारत को हर कीमत पर टालना चाहिए। यह समय है कि भारत सरकार स्पष्ट संदेश दे कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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