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झारखंड में आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर’ के पैर जमाने के कोशिश को एटीएस ने किया नकाम, अब तक 5 लोग गिरफ्तार

ByBinod Anand

May 2, 2025

रांची: झारखंड आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने आतंकी संगठन ‘हिज्ब उत तहरीर’ (Hizb ut-Tahrir) के झारखंड मॉड्यूल की जांच में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए एक ऐसे संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है, जिसका संबंध पूर्व में प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (Indian Mujahideen) से भी रहा है। यह गिरफ्तारी धनबाद से जुड़े मामले में हुई है और यह इस मॉड्यूल से संबंधित पांचवीं गिरफ्तारी है।

झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान अमार यसार के रूप में हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यसार पहले इंडियन मुजाहिदीन जैसे खूंखार आतंकी संगठन से जुड़ा रहा था।

2014 में इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध के तौर पर हुई थी गिरफ्तारी:

डीजीपी गुप्ता ने बताया कि अमार यसार को वर्ष 2014 में राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार किया गया था। उस समय, उस पर इंडियन मुजाहिदीन का संदिग्ध आतंकी होने का आरोप था। हालांकि, साल 2024 में जेल से रिहा होने के बाद, यसार एक बार फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया। इस बार, उसने हिज्ब उत तहरीर का दामन थाम लिया और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हो गया।

धनबाद से हुई सिलसिलेवार गिरफ्तारियां:

यह गिरफ्तारी उस सिलसिले का हिस्सा है जो शनिवार को धनबाद में झारखंड एटीएस की टीम द्वारा की गई छापेमारी के बाद शुरू हुआ था। एटीएस टीम ने धनबाद के अलीपुर और भूली के आजाद नगर अमन सोसायटी जैसे विभिन्न इलाकों में दबिश दी थी। इन छापों के दौरान, चार अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिनकी पहचान गुलफाम हसन (21 वर्ष), आयान जावेद (21 वर्ष), शबनम परवीन (20 वर्ष, आयान जावेद की पत्नी), और मोहम्मद शहजाद आलम (20 वर्ष) के रूप में हुई थी।

इन गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी, जिसमें दो पिस्तौल, 12 गोलियां, प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित कई किताबें और दस्तावेज, और आधा दर्जन से अधिक मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल हैं। इन बरामदगी से हिज्ब उत तहरीर के इस मॉड्यूल की देश विरोधी साजिशों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हिज्ब उत तहरीर: विचारधारा और भारत में प्रतिबंध:

हिज्ब उत तहरीर एक कट्टरपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1953 में यरुशलम में हुई थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर खिलाफत यानी एक इस्लामी राज्य की स्थापना करना है। यह संगठन लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारों को उखाड़ फेंकने और पूरे विश्व में इस्लामी शासन स्थापित करने की विचारधारा रखता है।

भारत सरकार ने इस संगठन की खतरनाक विचारधारा और देश विरोधी गतिविधियों को देखते हुए साल 2010 में इसे प्रतिबंधित कर दिया था। हिज्ब उत तहरीर का मुख्य काम युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और उन्हें विभिन्न आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। यह संगठन अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए विभिन्न प्रचार माध्यमों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है।

झारखंड मॉड्यूल की जांच और आगे की कार्रवाई:

अमार यसार की गिरफ्तारी झारखंड एटीएस के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि प्रतिबंधित संगठन किस प्रकार से पुराने और नए सदस्यों को मिलाकर अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। एटीएस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि अमार यसार जेल से निकलने के बाद किन लोगों के संपर्क में था और हिज्ब उत तहरीर में उसकी क्या भूमिका थी।

डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि एटीएस की टीम इस मॉड्यूल के अन्य सदस्यों और उनकी गतिविधियों की पहचान करने के लिए लगातार काम कर रही है। बरामद किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है ताकि इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके और उनके देश विरोधी मंसूबों को नाकाम किया जा सके।

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब देश में आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। झारखंड जैसे राज्य में, जहां पहले से ही नक्सलवाद एक बड़ी समस्या रही है, आतंकी संगठनों की इस प्रकार की पैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती पेश करती है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय:

एक ऐसे व्यक्ति का हिज्ब उत तहरीर जैसे प्रतिबंधित संगठन से जुड़ना, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित रहा हो, सुरक्षा एजेंसियों के लिए गहरी चिंता का विषय है। यह दर्शाता है कि आतंकी संगठन आपस में गठजोड़ कर सकते हैं या एक संगठन से निकाले गए या रिहा हुए सदस्य दूसरे संगठन में शामिल होकर अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रख सकते हैं।

यह भी सवाल उठता है कि अमार यसार जेल में रहते हुए किन लोगों के संपर्क में था और क्या जेल के अंदर भी कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार हो रहा था। इन सभी पहलुओं पर गहन जांच की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों की भूमिका और जागरूकता:

किसी भी आतंकी मॉड्यूल की पहचान और उसे नष्ट करने में स्थानीय लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को आम जनता से सहयोग की अपेक्षा रहती है ताकि संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना मिल सके। लोगों को अपने आसपास के माहौल के प्रति सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।

झारखंड एटीएस की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद और कट्टरपंथ के खतरे को लेकर गंभीर हैं और इस दिशा में लगातार काम कर रही हैं। हालांकि, इस खतरे की व्यापकता को देखते हुए, सभी स्तरों पर सतर्कता और समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता है।

आगे की चुनौतियां:

हिज्ब उत तहरीर जैसे संगठनों का युवाओं को बरगलाना और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सक्रिय रहना होगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों को भी मिलकर काम करना होगा। शिक्षा, जागरूकता और सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से दूर रखा जा सकता है।

इसके अलावा, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है, क्योंकि ये संगठन युवाओं तक अपनी जहरीली विचारधारा पहुंचाने के लिए इन माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं।

निष्कर्ष:

झारखंड एटीएस द्वारा इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े पूर्व आतंकी अमार यसार की हिज्ब उत तहरीर मॉड्यूल में गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण सफलता है। यह कार्रवाई न केवल इस विशेष मॉड्यूल को कमजोर करेगी बल्कि अन्य आतंकी तत्वों के लिए भी एक कड़ा संदेश देगी। हालांकि, आतंकवाद और कट्टरपंथ के खतरे को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास और सतर्कता आवश्यक है। सुरक्षा एजेंसियों को अपनी जांच जारी रखनी होगी और समाज के सभी वर्गों को इस लड़ाई में अपना योगदान देना होगा। यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि आतंकी संगठन अपनी रणनीति बदल रहे हैं और पुराने सदस्यों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को भी अपनी रणनीति में बदलाव और समन्वय लाना होगा।

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