स्मृतियों के झरोखे में एक ‘जिंदादिल’ व्यक्तित्व: प्रो. अशोक कुमार को अंतिम प्रणाम
प्राचार्य के पद पर आसीन होने के बाद भी अशोक सिन्हा क़े स्वभाव में किंचित मात्र भी बदलाव नहीं आया। सत्ता और पद अक्सर इंसान की सहजता छीन लेते हैं,…
वह अविस्मरणीय पल था, जब मुझे असरानी जी से मिलने का सौभाग्य मिला था
1987 में मुंबई में आयोजित भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में झारखंड के धनबाद जिले से हम कई कार्यकर्ता, तत्कालीन दिग्गज क्रांतिकारी नेता समरेश सिंह के नेतृत्व में भाग लेने गए…
