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निवार, 14 जून, 2025 का दिन बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा, जब मंगनी लाल मंडल ने बिहार राजद के अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। यह नामांकन ऐसे समय में हुआ है जब बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और राजद इस कदम को अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को साधने की एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देख रही है। मंडल का निर्विरोध निर्वाचन तय है, क्योंकि उनके अलावा किसी अन्य उम्मीदवार ने इस पद के लिए नामांकन नहीं किया है।

तेजस्वी यादव के साथ पहुंचे पार्टी कार्यालय, दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ नामांकन


मंगनी लाल मंडल सुबह तेजस्वी यादव के साथ गाड़ी से पार्टी कार्यालय पहुंचे। उनकी उम्मीदवारी को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का पूरा समर्थन प्राप्त है, जिसकी पुष्टि नामांकन दाखिल करते समय मौजूद दिग्गजों ने की। राजद सुप्रीमो लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, और सांसद मीसा भारती की उपस्थिति ने इस घटना को और भी खास बना दिया। यह साफ संकेत था कि मंडल को पार्टी के भीतर एक सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। राजद कार्यालय में पार्टी के राज्य निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. तनवीर हसन के समक्ष विधिवत नामांकन-पत्र दाखिल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जो मंडल की उम्मीदवारी के प्रति उत्साह और समर्थन प्रदर्शित कर रहे थे।

19 जून को होगी औपचारिक घोषणा, निर्विरोध निर्वाचन तय

मंगनी लाल मंडल का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय हो चुका है। एकमात्र उम्मीदवार होने के कारण, उनके अध्यक्ष बनने में कोई संदेह नहीं है। उनके नाम की औपचारिक घोषणा 19 जून को पटना के ज्ञान भवन में राजद के राज्य परिषद की बैठक में की जाएगी। यह बैठक पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होगी, जहां नए अध्यक्ष के नेतृत्व में भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस औपचारिक घोषणा के बाद, मंडल आधिकारिक तौर पर बिहार राजद के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल लेंगे और आगामी चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों का नेतृत्व करेंगे।

जगदानंद सिंह की जगह लेंगे मंगनी लाल मंडल: चुनावी वर्ष में ईबीसी पर फोकस

76 वर्षीय मंगनी लाल मंडल अब तक बिहार राजद के अध्यक्ष रहे जगदानंद सिंह की जगह लेंगे। यह बदलाव पार्टी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह आगामी विधानसभा चुनावों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। बिहार में ईबीसी समुदाय की आबादी सबसे अधिक, लगभग 36 प्रतिशत है। यह एक ऐसा वर्ग है, जिसका राजनीतिक झुकाव किसी एक दल की ओर स्थायी नहीं रहा है और चुनावों में इसकी भूमिका निर्णायक साबित होती है। राजद को उम्मीद है कि मंडल जैसे एक अनुभवी और ईबीसी समुदाय से आने वाले नेता को अध्यक्ष बनाकर वह इस बड़े वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित कर सकेगी।

मंगनी लाल मंडल को अत्यंत पिछड़े समाज का एक बड़ा नेता माना जाता है। उनकी लंबे समय से राजनीति में सक्रियता और विभिन्न पदों पर अनुभव उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है। उनका चयन एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सामाजिक समीकरणों को मजबूत करना और चुनावी लाभ प्राप्त करना है।

मंडल का राजनीतिक सफर: राजद से जदयू और फिर वापसी

मंगनी लाल मंडल का राजनीतिक सफर काफी लंबा और विविध रहा है। वह लंबे समय तक राजद में थे और पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक माने जाते थे। हालांकि, बाद में वे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में चले गए थे, जो कि बिहार में राजद की मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। यह कदम कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक था, लेकिन मंडल ने इसी साल जनवरी में जदयू छोड़कर वापस राजद में घर वापसी की। उनकी यह वापसी राजद के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी गई, खासकर जब पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीति बना रही थी।

मंडल का अनुभव सिर्फ पार्टी स्तर तक सीमित नहीं है। उन्होंने बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में 1986 से 2004 तक अपनी सेवाएं दी हैं। इस दौरान वे राज्य कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं, जिससे उन्हें राज्य के प्रशासन और नीतियों की गहरी समझ है। इसके अलावा, वह 2004 से 2009 तक राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। उनका यह व्यापक राजनीतिक अनुभव उन्हें बिहार राजद के अध्यक्ष के रूप में एक मजबूत और सक्षम नेता बनाता है।

आगामी विधानसभा चुनाव और राजद की रणनीति

बिहार में इसी साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह चुनाव राजद के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है और फिर से अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। मंगनी लाल मंडल को अध्यक्ष बनाने का फैसला इसी चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजद उम्मीद कर रही है कि मंडल के अनुभव, उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि और उनकी लोकप्रियता से पार्टी को अत्यंत पिछड़ा वर्ग का भारी समर्थन मिलेगा, जो कि चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हालांकि, यह देखना बाकी है कि इस फैसले से राजद को चुनाव में कितना लाभ होगा। बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहे हैं, और राजद ने मंडल के माध्यम से इस समीकरण को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। मंडल का नेतृत्व, उनकी संगठनात्मक क्षमताएं और ईबीसी समुदाय के साथ उनका जुड़ाव राजद को चुनावी मैदान में एक नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है। आगामी कुछ महीने बिहार की राजनीति में काफी गहमागहमी भरे रहने वाले हैं, और मंगनी लाल मंडल के नेतृत्व में राजद की चुनावी रणनीति और प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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