झारखंड की समृद्ध विरासत और पर्यटन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाले मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आयुष राणा को धनबाद जिला प्रशासन ने सम्मानित किया है। धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने आयुष के सराहनीय कार्यों के लिए उन्हें सर्टिफिकेट देकर प्रोत्साहित किया। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर और कोयलांचल के प्रसिद्ध शिक्षाविद दिवंगत डॉ. एस. एन. राणा के प्रपौत्र आयुष ने अपनी जड़ों से जुड़कर झारखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। आज वे अपनी मेहनत और जुनून से झारखंड टूरिज्म के एक प्रेरणादायक डिजिटल ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनकर उभरे है

झारखंड:झारखंड की धरती अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है। लेकिन इस खूबसूरती को दुनिया के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने का श्रेय आज के दौर में उन युवाओं को जाता है, जो तकनीक और परंपरा का बेहतरीन तालमेल बिठा रहे हैं। इसी कड़ी में झारखंड के मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आयुष राणा एक चमकते सितारे बनकर उभरे हैं, जिन्हें हाल ही में धनबाद जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया है।
प्रशासनिक सराहना और सम्मान
झारखंड के पर्यटन और ऐतिहासिक पहलुओं को सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के सराहनीय प्रयासों के लिए धनबाद के एसएसपी (SSP) प्रभात कुमार ने आयुष राणा को प्रशस्ति पत्र (सर्टिफिकेट) देकर सम्मानित किया। इस दौरान एसएसपी ने आयुष के काम की सराहना करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना न केवल गर्व की बात है, बल्कि यह राज्य के विकास और पर्यटन को नई दिशा देने वाला कदम है।
विरासत और शिक्षा का संगम
आयुष राणा का परिचय केवल एक इन्फ्लुएंसर के रूप में ही नहीं है, बल्कि उनकी जड़ें शिक्षा और संस्कार से बहुत गहरी जुड़ी हैं। वे आर.एस. मोर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और कोयलांचल के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद दिवंगत डॉ. एस. एन. राणा के प्रपौत्र हैं। आयुष पेशे से एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं, लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बावजूद उनका अपनी मिट्टी के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ। उन्होंने अपने कौशल का उपयोग झारखंड के गुमनाम किलों, झरनों और लोक कलाओं को सिनेमाई अंदाज में दिखाने के लिए किया।
बदलती तस्वीर: जोहार झारखंड
आयुष राणा आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपनी जड़ों को भूलकर आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो रहे हैं। आयुष ने यह साबित कर दिया कि यदि हुनर और जुनून हो, तो अपनी मिट्टी का नाम रोशन करना मुश्किल नहीं है। उनके वीडियो और कंटेंट ने न केवल पर्यटकों को झारखंड की ओर आकर्षित किया है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी अपनी विरासत के प्रति गर्व का भाव पैदा किया है।
धनबाद जिला प्रशासन द्वारा मिला
यह सम्मान इस बात की पुष्टि करता है कि अब प्रशासन भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘डिजिटल इन्फ्लुएंस’ के महत्व को स्वीकार कर रहा है। आयुष राणा सही मायने में झारखंड टूरिज्म के एक आधुनिक ‘ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

