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AVN Antarkatha

लोगों की मन्नत पूरा करने वाला जंजीरों से जकड़ा पेड़, 300 सालों सें लोग यहां करते हैं पूजा,

ByBinod Anand

Apr 18, 2025

 

छतरपुर के बरट सड़ेरी गांव में एक ऐसा पेड़ है जिसे लेकर लोगों में जबरदस्त आस्था है. इसे जंजीरों वाला पेड़ कहा जाता है.

भा रत आस्था और परम्पराओं का देश है हमारे संस्कृति और परम्परा में कई ऐसी मान्यतायें है जिस पर हम पूरा भरोसा करते हैं. ऐसे कई परम्पराओं में है एक परम्परा है बृक्ष की पूजा.

सदियों से हम पेड़ों की पूजा करते आ रहे हैं . बरगद, पीपल, आंवला, बेलपत्र से लेकर कई ऐसे पेड़ हैं जिनको देवताओं की तरह हम पूजते हैं. वहीं कई पेड़ और भी ऐसे पेड़ हैं जिन्हें लोग स्थानीय स्तर पर पूजते चले आ रहे हैं.

एक ऐसा पेड़ छतरपुर से 27 किलोमीटर दूर बरट सड़ेरी गांव में है जिसको लेकर लोगों में जबरदस्त आस्था है. इसे जंजीरों वाला पेड़ कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां मन्नत पूरी होने पर लोग प्रसाद के रूप में पेड़ पर जंजीर सें बांधते हैं.

300 साल सें अधिक पुराना है यह पेड़

यहां के स्थानीय लोगों की मानें तो यह पेड़ 300 साल पुराना है. अगर किसी पेड़ में हम लोहे की कील ठोक दें तो पेड़ सूखने लगता है.लेकिन बरट सड़ेरी गांव की यह 300 साल पुराना पेड़ आज भी कील ठोके जाने के बाद हरा -भरा है. इस पेड़ पर कई क्विंटल लोहे की जंजीरे बंधी हुई हैं. अकोला का यह पेड़ कई दशकों से लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है.

यहां मन्नत पूरी होने पर लोग चढ़ाते हैं लोहे की जंजीरें

बरट सड़ेरी गांव में स्थित इस अकोला के पेड़ को लेकर मान्यता है कि यह लोगों की मन्नत पूरी करता है. लोग यहां दूर-दूर से मन्नत मांगने आते हैं. यहां दुआ करते हैं,मत्था टेकते हैं और जब मन्नत पूरी हो जाती है तो लोहे की जंजीर लेकर आते हैं. भक्त इस पेड़ पर प्रसाद के रूप में लोहे की जंजीरें चढ़ाते हैं या यूं कहें कि उन्हें यहां बांध जाते हैं.

लोग यहां जंजीरों को पकड़कर मांगते हैं मन्नत

यहां आने वाले लोगों में ऐसी आस्था है कि अब यह पेड़ दुखों की जंजीरों से आजाद कर करने के लिए जाना जाता है. दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और पेड़ में लगी जंजीरों को पकड़कर मन्नत मांगते हैं. मन्नत पूरी होने पर लोग श्रद्धा भाव के तौर पर लोहे की जंजीर ठोक जाते हैं.

स्थानीय निवासी गिरधारी कुशवाहाबताते हैं कि “वह अपने जन्म के बाद से ही इस पेड़ को इसी प्रकार से देख रहे हैं. इस पेड़ मेंं देवता वास करते हैं. यहां लोग बच्चे की मन्नत, कुवांरो के लिए शादी की मन्नत, बीमारी, विवाद निपटाने, धन-दौलत सहित अन्य परेशानियों को लेकर दूर-दूर से लोग आते हैं और उनको लाभ होता है तभी तो ये पेड़ जंजीरों से लद चुका है. बुंदेलखंडी में इसे लोग सांग ठोकना, कुंडी लगाना, बांधना भी कहते हैं.”

जंजीर नहीं चढ़ाने पर होता है अहित’

स्थानीय निवासी प्रताप राजपूत बताते हैं कि “इस पेड़ में गोंड बब्बा वास करते हैं. यहां इसे ऐसे ही देखते देखते मेरी तीन पीढ़ियां बीत गईं. यह पेड़ करीब 300 साल पुराना है. यहां जो भी सच्चे मन से मनोकामना मांगता है तो वह पूरी होती है. मन्नत पूरी होने पर जो लोग जंजीर नहीं चढ़ाते हैं उसके घरों में कष्ट होना भी शुरू हो जाता है. अगर कोई जंजीर उठा ले जाता है तो उसका अहित होना शुरू हो जाता है.”

हिंदू धर्म में पेड़ों की होती है पूजा’

पंडित गणेश प्रसाद बाजपेयी बताते हैं कि “हिंदू धर्म में पेड़-पौधों को ईश्वर के समान पूजनीय और पवित्र माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार पेड़ों पर तमाम देवी, देवताओं का वास होता है, जिनकी पूजा करने पर व्यक्ति के जीवन से जुड़े तमाम तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं. सच्चे मन से पूजा अर्चना करने पर हर मनोकामना पूरी होती है और दुखों का नाश होता है.”

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