अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में भव्य संगोष्ठी का आयोजन
गोविंदपुर, 2 नवंबर 2026: अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, गोविंदपुर में सोमवार को ‘सह-शैक्षिक गतिविधियां पढ़ाई में बाधा या व्यक्तित्व विकास की कुंजी’ विषय पर एक भव्य और अत्यंत विचारोत्तेजक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में बी.एड. सत्र 2026-28 के प्रशिक्षुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विषय के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में सह-शैक्षिक गतिविधियों (Co-Curricular Activities-CCA) के महत्व और उनके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना था।
कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य अतिथि

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शमीम अहमद ने की, जबकि विशेष अतिथि के रूप में +2 हाई स्कूल, गोविंदपुर के प्रधानाचार्य विजय कुमार तांती उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रशिक्षुओं के बौद्धिक मंथन और भाषण प्रस्तुति से हुई। सेमिनार में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रतिभागियों का चयन किया गया:
- प्रथम स्थान: शिफा (अनुक्रमांक-9)
- द्वितीय स्थान: साक्षी श्रीवास्तव (अनुक्रमांक-5)
- तृतीय स्थान: अविनाश कुमार (अनुक्रमांक-18)
इन सभी विजेता प्रशिक्षुओं को संस्थान की ओर से मोमेंटो सह मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
शिक्षा का व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का स्वरूप निरंतर व्यापक और व्यावहारिक होता जा रहा है। अब शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों का रटा-रटaya ज्ञान देना या परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर जीवनोपयोगी कौशल, नैतिक मूल्य, सामाजिक चेतना, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी है। इसी व्यापक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया था।
प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शमीम अहमद के विचार
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शमीम अहमद ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल विषयगत ज्ञान देना नहीं है, बल्कि भावी शिक्षकों को एक कुशल, दक्ष, संवेदनशील और उत्तरदायी शिक्षक के रूप में तैयार करना है।
उन्होंने कौशल-आधारित सक्षमता (Competency-Based Skills) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक समय में एक शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे विद्यार्थियों का मार्गदर्शक, प्रेरक, परामर्शदाता और व्यक्तित्व निर्माता बनना पड़ता है। इसके लिए संप्रेषण कौशल, समस्या समाधान, रचनात्मक चिंतन, समय प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन जैसे गुणों का होना अनिवार्य है। इन गुणों के विकास में सेमिनार, कार्यशालाएं और सह-शैक्षिक गतिविधियां रीढ़ की हड्डी का काम करती हैं।
विशेष अतिथि विजय कुमार तांती का संबोधन
विशेष अतिथि विजय कुमार तांती ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। केवल पुस्तकीय ज्ञान और परीक्षा परिणाम किसी विद्यार्थी की संपूर्ण योग्यता का मूल्यांकन नहीं कर सकते। प्रत्येक विद्यार्थी में अनूठी प्रतिभा होती है, और सह-शैक्षिक गतिविधियां उन्हीं प्रतिभाओं को बाहर निकालने का सबसे बेहतरीन मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, वाद-विवाद, निबंध लेखन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
क्या सह-शैक्षिक गतिविधियां पढ़ाई में बाधा हैं? (केंद्रीय विमर्श)
सेमिनार का केंद्रीय विषय इस बात पर केंद्रित था कि क्या सह-शैक्षिक गतिविधियां पढ़ाई में बाधा हैं या व्यक्तित्व विकास की कुंजी? विमर्श के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि:
- ये गतिविधियां अपने आप में पढ़ाई की बाधक नहीं होतीं, बल्कि उनका प्रभाव उनके उचित नियोजन और समय-निर्धारण पर निर्भर करता है।
- वाद-विवाद और भाषण से तार्किक चिंतन व अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ती है।
- समूह चर्चा से सहयोग और संवाद कौशल का विकास होता है।
- खेलकूद से अनुशासन और टीम भावना मजबूत होती है।
- सांस्कृतिक गतिविधियों से आत्मविश्वास और कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलता है।
अंततः इस संगोष्ठी का सर्वमान्य निष्कर्ष यही रहा कि सह-शैक्षिक गतिविधियां पढ़ाई की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि शिक्षा की पूरक और व्यक्तित्व विकास की सशक्त कुंजी हैं। अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज का यह आयोजन प्रशिक्षुओं के लिए न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि उनके अंदर एक आदर्श और कुशल शिक्षक बनने की प्रेरणा भी जगा गया।

