पुस्तक : “चालीसा संग्रह : अंतर्मन से अनंत तक”
लेखिका : शिवलाल दाँगी
प्रकाशक : शिवोहम प्रकाशन, कोलकाता / हैदराबाद
ईमेल :[email protected]
अन्य पुस्तकें–1 काव्य संग्रह ‘समर्पण’
2 चालीसा संग्रह ‘धरा से दिव्यता तक’
3 काव्य संग्रह ‘रिश्ते’
4 चालीसा संग्रह ‘भाव प्रकाश ‘
भा रतीय संस्कृति में भक्ति साहित्य का एक विशेष स्थान रहा है। युगों से संतों, कवियों और भक्तों ने अपने भावों को शब्दों में पिरोकर समाज को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने का कार्य किया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाती हुई “चालीसा संग्रह : अंतर्मन से अनंत तक” एक ऐसी कृति है, जो पाठक को भक्ति, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक चेतना के निकट ले जाने का प्रयास करती है। यह पुस्तक केवल चालीसाओं का संकलन नहीं है, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन से ईश्वर की अनंत सत्ता तक की यात्रा का एक सशक्त माध्यम है।
पुस्तक का शीर्षक अपने आप में अत्यंत सार्थक और प्रभावशाली है। “अंतर्मन” व्यक्ति के भीतर स्थित भावनाओं, विचारों और चेतना का प्रतीक है, जबकि “अनंत” परमात्मा, ब्रह्म और उस असीम शक्ति का संकेत देता है जो समस्त सृष्टि का आधार है।
इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और सहजता है। पुस्तक में संकलित चालीसाएँ भक्तिभाव से परिपूर्ण हैं तथा सामान्य पाठक भी उन्हें आसानी से पढ़ और समझ सकता है। भाषा में कहीं भी अनावश्यक जटिलता नहीं दिखाई देती, जिससे यह कृति हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी बन जाती है।
चालीसाओं का चयन इस प्रकार किया गया है कि वे केवल धार्मिक अनुष्ठान का भाग न बनकर जीवन के नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों को भी स्थापित करें।
पुस्तक में भक्ति के विभिन्न स्वरूपों का सुंदर समावेश दिखाई देता है। प्रत्येक चालीसा अपने आराध्य के गुणों, आदर्शों और महिमा का वर्णन करते हुए पाठक के मन में श्रद्धा और विश्वास का संचार करती है। इन रचनाओं को पढ़ते समय ऐसा प्रतीत होता है मानो पाठक किसी आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बन गया हो। शब्दों की मधुरता, भावों की पवित्रता और प्रस्तुति की सादगी इसे विशेष बनाती है।
आज के भौतिकवादी और व्यस्त जीवन में मनुष्य अनेक प्रकार की चिंताओं, तनावों और असंतोष से घिरा हुआ है। ऐसे समय में यह पुस्तक मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का संदेश देती है। चालीसाओं के नियमित पाठ से व्यक्ति के भीतर सकारात्मकता का विकास होता है तथा वह स्वयं को ईश्वर के अधिक निकट अनुभव करता है। पुस्तक यह विश्वास जगाती है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का एक मार्ग भी है।
साहित्यिक दृष्टि से भी यह कृति उल्लेखनीय है। इसमें धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। लेखक/संकलक ने पारंपरिक भक्ति साहित्य की गरिमा को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक पाठकों के लिए भी प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया है। यही कारण है कि पुस्तक केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक साहित्यिक कृति के रूप में भी स्थापित होती है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि यह पाठक को आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करती है। चालीसाओं के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर झाँकने का अवसर प्राप्त करता है और अपने जीवन के उद्देश्य, कर्म तथा मूल्यों पर विचार करता है। इस प्रकार यह कृति आध्यात्मिक जागरण के साथ-साथ आत्मविकास का भी माध्यम बन जाती है।
अंततः कहा जा सकता है कि “चालीसा संग्रह : अंतर्मन से अनंत तक” एक उत्कृष्ट, प्रेरणादायक और संग्रहणीय पुस्तक है। यह भक्ति, श्रद्धा, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है। जो पाठक धार्मिक साहित्य में रुचि रखते हैं या अपने जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की खोज कर रहे हैं, उनके लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। यह कृति वास्तव में अंतर्मन को प्रकाशित कर उसे अनंत चेतना की ओर अग्रसर करने का सार्थक प्रयास है।
शिवोहम प्रकाशन
कोलकाता / हैदराबाद
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