सिंह मेंशन का इतिहास स्वर्गीय सूरजदेव सिंह के दौर से ही धनबाद की नियति तय करता रहा है। संजीव सिंह का मेयर बनना इस पुरानी विरासत को आधुनिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जन सेवा के नए स्वरूप के साथ जोड़ने का एक सफल प्रयास है।
(विनोद आनंद )
को यलांचल की हृदयस्थली धनबाद में इस बार की होली केवल पारंपरिक रंगों और उल्लास तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आगामी राजनीतिक भविष्य की एक नई और प्रभावी इबादत लिख दी है। धनबाद की सत्ता का दशकों से केंद्र रहे ‘सिंह मेंशन’ में आयोजित होली मिलन समारोह इस बार एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और अंतर्राज्यीय संबंधों के संगम के रूप में उभरा। इस आयोजन की सबसे खास और चर्चा का विषय रही बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जामा खान की उपस्थिति, जिसने स्थानीय गलियारों से लेकर राज्य स्तरीय राजनीति तक में हलचल मचा दी है। नवनियुक्त महापौर संजीव सिंह के आवास पर आयोजित इस मिलन समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धनबाद नगर निगम के चुनाव परिणाम केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थे, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार के लिए भी खासे महत्वपूर्ण रहे हैं।
बिहार के कद्दावर नेता जामा खान का विशेष रूप से पटना से धनबाद आना और संजीव सिंह को उनकी ऐतिहासिक जीत की व्यक्तिगत रूप से बधाई देना इस बात का पुख्ता संकेत है कि जेडीयू और बिहार सरकार झारखंड की राजनीति में अपनी सक्रियता और प्रभाव को नए सिरे से परिभाषित करने की तैयारी में है। समारोह के दौरान जब दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया, तो वह केवल एक शिष्टाचार की भेंट नहीं थी, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक सेतु का निर्माण था।
जामा खान ने इस अवसर पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि जनता का इतना भारी विश्वास जीतना कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है और यह एक बड़ी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संजीव सिंह के नेतृत्व में धनबाद विकास की उन ऊंचाइयों को छुएगा जिसकी प्रतीक्षा यहाँ की जनता दशकों से कर रही है।
संजीव सिंह की जीत को राजनीतिक विश्लेषक एक बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। धनबाद एक ऐसा क्षेत्र रहा है जहाँ विकास और कोयला सिंडिकेट के बीच की रेखा हमेशा धुंधली रही है, लेकिन एक युवा और स्पष्ट विजन वाले चेहरे को चुनकर यहाँ की जनता ने विकासवाद की राजनीति को प्राथमिकता दी है। मेयर के सामने चुनौतियों का पहाड़ है, जिनमें दशकों पुराना पेयजल संकट, कचरा प्रबंधन, जर्जर ड्रेनेज सिस्टम और कोयला खदानों से होने वाला जानलेवा वायु प्रदूषण शामिल है। इन समस्याओं के समाधान के लिए संजीव सिंह को न केवल प्रशासनिक कौशल बल्कि बाहरी राज्यों के सफल मॉडलों के सहयोग की भी आवश्यकता होगी।
जामा खान की उपस्थिति इसी सहयोग की एक कड़ी मानी जा रही है, जहाँ बिहार के शहरी विकास के अनुभवों को धनबाद में साझा करने की संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।
यह मुलाकात अल्पसंख्यक और समावेशी राजनीति के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक हिंदू बहुल क्षेत्र और सिंह मेंशन जैसी पारंपरिक छवि वाले गढ़ में बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत होना ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का एक जीवंत उदाहरण पेश करता है। यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि विकास की राजनीति में जाति और धर्म के बंधन गौण हो जाते हैं।
धनबाद में एक बहुत बड़ा मतदाता वर्ग ऐसा है जिसका मूल नाता बिहार से है, और जामा खान की सक्रियता निश्चित रूप से इस वोट बैंक को एक खास दिशा में एकजुट करने का सामर्थ्य रखती है।
सिंह मेंशन का इतिहास स्वर्गीय सूरजदेव सिंह के दौर से ही धनबाद की नियति तय करता रहा है। संजीव सिंह का मेयर बनना इस पुरानी विरासत को आधुनिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जन सेवा के नए स्वरूप के साथ जोड़ने का एक सफल प्रयास है। होली मिलन के दौरान उमड़ी समर्थकों की अपार भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आज भी इस क्षेत्र का नेतृत्व सिंह मेंशन की दहलीज से ही तय होता है, लेकिन इस बार का नेतृत्व ‘बाहुबल’ के बजाय ‘विकासवाद’ के नारों के साथ खड़ा है। कार्यक्रम के दौरान जिस तरह से आम नागरिकों ने सीधे मंत्री और मेयर से संवाद किया, वह भविष्य की एक पारदर्शी कार्यप्रणाली का संकेत देता है।
अंततः, यह मिलन समारोह केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि संभावनाओं का एक बड़ा मंच साबित हुआ है। यदि जामा खान की शुभकामनाएं और संजीव सिंह का संकल्प धरातल पर उतरता है, तो धनबाद के लिए आने वाला समय स्वर्णिम हो सकता है। अब बधाई और समारोहों का दौर बीत चुका है और जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सिंह मेंशन से शुरू हुआ यह विकास का रंग धनबाद की धूल भरी सड़कों और प्यासे हलकों तक कितनी जल्दी पहुँचता है। राजनीति जब सद्भाव के रंगों में घुलती है, तो उसकी खुशबू वास्तव में दूर तक जाती है, और धनबाद फिलहाल इसी खुशबू के हकीकत में बदलने का इंतजार कर रहा है।

