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AVN Antarkatha

झारखंड बजट 2026: ‘खोखले वादों का पुलिंदा’, झरिया विधायक रागिनी सिंह ने सरकार को घेरा

ByBinod Anand

Feb 24, 2026

 

बजट  केवल ‘घोषणाओं और आंकड़ों का दस्तावेज’ है। जनता को उम्मीद थी कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे ज्वलंत मुद्दों पर ठोस समाधान प्रस्तुत करेगी, लेकिन बजट में इन विषयों को दरकिनार कर केवल खानापूर्ति की गई है:-रागनी सिंह (भाजपा विधायक )

रांची: झारखंड सरकार द्वारा आज विधानसभा में पेश किए गए बजट ने राज्य की राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। विपक्षी खेमे ने बजट को पूरी तरह से दिशाहीन और निराशाजनक करार दिया है। इस कड़ी में झरिया की विधायक रागिनी सिंह ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे राज्य की जनता की उम्मीदों के विपरीत बताया है।

घोषणाओं का पिटारा, धरातल पर शून्य

विधायक रागिनी सिंह ने बजट को केवल ‘घोषणाओं और आंकड़ों का दस्तावेज’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि जनता को उम्मीद थी कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे ज्वलंत मुद्दों पर ठोस समाधान प्रस्तुत करेगी, लेकिन बजट में इन विषयों को दरकिनार कर केवल खानापूर्ति की गई है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “यह बजट झारखंड के विकास की राह दिखाने के बजाय सरकार की नीतिगत अस्पष्टता को दर्शाता है। विभागों के बीच तालमेल की कमी साफ झलक रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार के पास राज्य के भविष्य का कोई ठोस खाका नहीं है।”

युवाओं और किसानों की अनदेखी

रागिनी सिंह ने विशेष रूप से युवाओं और किसानों की स्थिति पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन बजट में उनके लिए कोई स्पष्ट रोजगार नीति या अवसर का जिक्र नहीं है। इसी तरह, किसान अपनी उपज का सही मूल्य न मिल पाने और सिंचाई जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिन्हें इस बजट में पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं, छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों को भी इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें केवल निराशा हाथ लगी है। महंगाई की मार झेल रही आम जनता को सरकार ने कोई राहत नहीं दी है।”

‘खोखले वादों से ऊपर उठकर जवाबदेही तय करे सरकार’

विधायक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड की जनता अब खोखले वादों और चुनावी जुमलों से ऊब चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य को अब कागजी आंकड़ों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली व्यवस्था की जरूरत है।

रागिनी सिंह ने मांग की कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा न करे, बल्कि उनकी जवाबदेही तय करे। उन्होंने कहा, “जवाबदेही ही विकास की पहली सीढ़ी है। अगर सरकार वास्तव में जनता की भलाई चाहती है, तो उसे धरातल पर काम करके दिखाना होगा, न कि विधानसभा में महज कुछ पन्नों का पुलिंदा पेश करना होगा।”

झरिया विधायक की यह टिप्पणी झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में सरकार की घेराबंदी का एक हिस्सा है। यह बजट सत्र आने वाले दिनों में और अधिक गर्माने वाला है, क्योंकि विपक्ष हर मोर्चे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या सफाई देती है और जनता की उन बुनियादी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाती है, जिन्हें इस बजट में नजरअंदाज किया गया है।

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