सिंह मैंशन पर हमले के बाद धनबाद का उमड़ा जनसमर्थन: रागिनी और संजीव सिंह के पक्ष में जनता हुए एकजूट
धनबाद की राजनीति में सिंह मेंशन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि धनबाद औऱ झरिया की जनता की उम्मीदों और उनके अटूट भरोसे का प्रतीक रहा है। कल देर रात इस ऐतिहासिक आवास पर कायरतापूर्ण बमबाजी की घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे कोयलांचल की जनभावनाओं को झकझोर कर रख दिया है।
इस निंदनीय हमले के बाद धनबाद एवं झरिया की जनता ने जिस तरह से अपनी एकजुटता का परिचय दिया है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिंसा के दम पर जन-नायकों के प्रति लोगों के प्रेम को कम नहीं किया जा सकता। सुबह की पहली किरण के साथ ही सिंह मैंशन के द्वार पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।
यह जनता का प्रेम इस बात का जीवित प्रमाण है कि विधायक रागिनी सिंह और पूर्व विधायक संजीव सिंह के प्रति जनता का समर्पण आज भी उतना ही अडिग है, जितना दशकों पहले सूर्य देव सिंह के प्रति था। लोग केवल हाल-चाल जानने नहीं आए थे, बल्कि वे एक ऐसी दीवार बनकर खड़े नजर आए जिसे भेद पाना किसी भी अपराधी या साजिशकर्ता के लिए असंभव है।
इस घटना के बाद का दृश्य भावुक करने वाला और साथ ही विरोधियों को कड़ा संदेश देने वाला था। झरिया के कोने-कोने से आए समर्थक, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा अपनी प्रिय नेत्री रागिनी सिंह और जन-जन के चहेते नेता संजीव सिंह के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त करने पहुंचे। सिंह मैंशन के प्रांगण में पैर रखने की जगह नहीं थी और हर चेहरे पर अपने नेताओं के प्रति चिंता के साथ-साथ हमलावरों के खिलाफ गहरा आक्रोश था।
यह जनसैलाब केवल एक भीड़ नहीं थी, बल्कि यह उन हजारों परिवारों की दुआएं थीं जिन्होंने संजीव सिंह और रागिनी सिंह को हमेशा अपने सुख-दुख का साथी माना है। जनता का यह उमड़ता हुआ प्रेम इस सत्य को पुष्ट करता है कि संजीव सिंह की राजनीतिक विरासत और रागिनी सिंह की सेवा भावना ने लोगों के दिलों में एक अमिट स्थान बना लिया है। जिस प्रकार संजीव सिंह ने हमेशा झरिया के हितों के लिए अपनी आवाज बुलंद की और रागिनी सिंह ने विधायक के रूप में दिन-रात जनता की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया, उसी का परिणाम है कि आज संकट की इस घड़ी में पूरी जनता उनके पीछे चट्टान की तरह खड़ी है।
यह हमला केवल एक आवास पर हमला नहीं था, बल्कि यह झरिया की शांति, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के विश्वास पर किया गया प्रहार था। लेकिन हमलावरों की यह साजिश पूरी तरह विफल साबित हुई है। डराने और भय का माहौल पैदा करने की कोशिश करने वालों को जनता ने अपने भारी हुजूम से यह बता दिया है कि झरिया की धरती न तो कभी झुकी है और न ही कभी डर और हिंसा के सामने घुटने टेकेगी।
रागिनी सिंह ने इस दौरान जिस धैर्य और मजबूती का परिचय दिया, उसने समर्थकों के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया है। समर्थकों का कहना है कि संजीव सिंह जी और रागिनी सिंह जी केवल नेता नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के संरक्षक हैं। उनके साथ खड़ा होना झरिया के स्वाभिमान के साथ खड़ा होना है।
जनता का मानना है कि इस तरह की ओछी हरकतें वही लोग कर रहे हैं जो उनके बढ़ते प्रभाव और जनता के प्रति उनके निस्वार्थ लगाव से घबराए हुए हैं।
जैसे-जैसे दिन ढलता गया, सिंह मैंशन में समर्थकों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही गई। लोग अपनी भावनाओं को रोक नहीं पा रहे थे, कई बुजुर्गों की आंखों में आंसू थे तो युवाओं की मुट्ठियां गुस्से में भिंची हुई थीं। रागिनी सिंह ने सभी से मुलाकात की और उनकी हिम्मत बंधाई, जो एक सच्चे जन-नायक की पहचान है। संजीव सिंह जी के प्रति लोगों का भावनात्मक जुड़ाव आज भी इतना गहरा है कि उनके नाम मात्र से ही हजारों लोग किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हो जाते हैं।
आज का यह अभूतपूर्व समर्थन इस बात की तस्दीक करता है कि सिंह मैंशन की जड़ें झरिया एवं धनबाद की मिट्टी में बहुत गहरी हैं। यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो स्थान संजीव सिंह और रागिनी सिंह ने लोगों के दिलों में बनाया है, उसे बम और गोलियों की गूंज से नहीं मिटाया जा सकता। अंततः, जनता के इस अटूट विश्वास ने यह संदेश पूरी दुनिया को दे दिया है कि झरिया के इन जन-नायकों का सुरक्षा कवच उनकी जनता का प्यार ही है, जो किसी भी हथियार से कहीं अधिक शक्तिशाली है।
