बड़कागांव (हजारीबाग): स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अदाणी फाउंडेशन द्वारा मंगलवार को बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीबी पोषण आहार वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान के पांचवें चरण के तहत क्षेत्र के 80 टीबी मरीजों के बीच उच्च गुणवत्ता वाली पोषण किट वितरित की गईं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना और उनके उपचार की प्रक्रिया को तेज करना है।
संतुलित आहार ही स्वस्थ होने की कुंजी: डॉ. अंजू प्रभा
कार्यक्रम का आयोजन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंजू प्रभा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। मरीजों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी के उपचार में दवाओं के साथ-साथ पौष्टिक और संतुलित आहार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा:
“टीबी एक ऐसी बीमारी है जिससे पूरी तरह ठीक होना संभव है, बशर्ते मरीज नियमित रूप से दवा का सेवन करें और अपने खान-पान में प्रोटीन व विटामिन से भरपूर आहार शामिल करें।”:-अंजू प्रभा
शिविर में सीएसआर (CSR) टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई और उपस्थित मरीजों को टीबी के लक्षणों, इससे बचाव के उपायों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में विस्तार से जागरूक किया।
जागरूकता सामग्री का वितरण और आगामी शिविर
मरीजों को केवल शारीरिक पोषण ही नहीं, बल्कि ‘जानकारी का पोषण’ भी दिया गया। शिविर के दौरान टीबी से संबंधित सावधानियों और पोषण संबंधी मार्गदर्शन के सूचना-पत्र (Pamphlets) वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई कि इस श्रृंखला का अगला और अंतिम शिविर 17 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी लाभार्थियों को समय पर पहुँचकर इसका लाभ उठाने का सुझाव दिया है।
क्षेत्रीय विकास में अदाणी फाउंडेशन की भूमिका
अदाणी फाउंडेशन केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि बड़कागांव के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्यरत है। फाउंडेशन द्वारा संचालित अन्य प्रमुख गतिविधियाँ इस प्रकार हैं:
- शिक्षा: सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सुधार और बुनियादी ढांचा विकास।
- महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
- आजीविका: स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर।
- सामुदायिक विकास: स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार।
अदाणी फाउंडेशन की यह पहल न केवल स्वास्थ्य मानकों में सुधार कर रही है, बल्कि समाज के सबसे जरूरतमंद तबके को यह भरोसा भी दिला रही है कि वे अपनी लड़ाई में अकेले नहीं हैं।

