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यह जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन युक्त नमक को 40 साल पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में यह प्रचलन में नहीं है। डेनमार्क की सरकार ने तो 1956 में ही आयोडीन युक्त नमक पर प्रतिबंध लगा दिया था। उनका अनुभव था कि 1940 से 1956 तक आयोडीन युक्त नमक के सेवन से अधिकांश लोग नपुंसक हो गए थे, और जनसंख्या इतनी कम हो गई थी कि देश के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था। उनके वैज्ञानिकों ने आयोडीन युक्त नमक को बंद करने की सलाह दी, जिसके बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

विडंबना यह है कि जब भारत में आयोडीन का यह ‘खेल’ शुरू हुआ, तो देश के कुछ ‘बेशर्म नेताओं’ ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत में बिक नहीं सकता। यह स्थिति कुछ समय पहले तक बनी रही, जब तक कि किसी ने कोर्ट में मुकदमा दायर कर इस प्रतिबंध को हटवाया।

विनोद आनंद

भारत में नमक के उपयोग का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन 20वीं सदी के मध्य से इसमें एक बड़ा बदलाव आया है, जिसने हमारे स्वास्थ्य और पारंपरिक खाद्य आदतों को प्रभावित किया है। यह बदलाव समुद्री नमक और आयोडीन के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसके चलते सदियों से इस्तेमाल होने वाला सेंधा नमक हमारी थाली से लगभग गायब हो गया। इस पूरे घटनाक्रम में विदेशी कंपनियों और अंग्रेजी प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

सेंधा नमक: प्रकृति का उपहार

हम में से कई लोग सोचते हैं कि सेंधा नमक बनता कैसे है, जबकि सच्चाई यह है कि यह बनता नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से पहले से ही बना हुआ है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’, ‘सैन्धव नमक’ या ‘लाहौरी नमक’ जैसे नामों से जाना जाता है। ये नाम इस बात का संकेत देते हैं कि यह नमक ‘सिंध’ या ‘सिंधु’ के इलाके से आता है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित खेवड़ा नमक की खानें इसका प्रमुख स्रोत हैं, जहां नमक के विशाल पहाड़ और सुरंगें हैं। यह नमक मोटे टुकड़ों में पाया जाता है, हालांकि आजकल यह पिसा हुआ भी बाजार में उपलब्ध है।

आयुर्वेद के अनुसार, सेंधा नमक के कई लाभ हैं। इसे हृदय के लिए उत्तम माना जाता है, यह दीपन (पाचन अग्नि को बढ़ाने वाला) और पाचन में सहायक है। यह त्रिदोष शामक (वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करने वाला) है और शीतवीर्य (ठंडी तासीर वाला) होने के कारण पचने में हल्का होता है। यह पाचक रसों को बढ़ाता है, जिससे भोजन का बेहतर अवशोषण होता है। इसके क्षारीय (alkaline) गुण शरीर में अम्लता को बेअसर करते हैं, जिससे रक्त की अम्लता कम होती है और शरीर के लगभग 48 रोगों में आराम मिलता है। सेंधा नमक शरीर में पूरी तरह से घुलनशील होता है, और इसकी शुद्धता का प्रमाण यह है कि उपवास और व्रतों में इसी का सेवन किया जाता है, क्योंकि इसे पवित्र माना जाता है। यह शरीर में 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में भी सहायक है, जिसकी कमी से लकवे (paralysis) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। कई आयुर्वेदिक औषधियों, जैसे लवण भास्कर और पाचन चूर्ण में भी इसका प्रयोग होता है।

समुद्री नमक और आयोडीन का ‘खेल’

भारत में 1930 से पहले समुद्री नमक का प्रचलन बहुत कम था। अधिकांश लोग सेंधा नमक का ही उपयोग करते थे। लेकिन, आजादी से पहले ही विदेशी कंपनियां भारत के नमक व्यापार में उतर चुकी थीं। इन्हीं कंपनियों के कहने पर, भारत के अंग्रेजी प्रशासन ने आयोडीन मिलाकर समुद्री नमक को बढ़ावा देना शुरू किया।

वैश्वीकरण (Globalization) के बाद जब अन्नपूर्णा, कैप्टन कुक जैसी विदेशी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर नमक बेचना शुरू किया, तब यह ‘खेल’ और तेज हो गया। इन कंपनियों का मकसद मोटा मुनाफा कमाना था। इसके लिए पूरे भारत में एक सुनियोजित प्रचार अभियान चलाया गया कि ‘आयोडीन युक्त नमक खाओ’, ‘आप सबको आयोडीन की कमी हो गई है’, ‘यह सेहत के लिए बहुत अच्छा है’ आदि। जिस नमक की कीमत कभी 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम होती थी, आयोडीन नमक के नाम पर उसकी कीमत सीधे 8 रुपये प्रति किलोग्राम और आज तो 20 रुपये से भी अधिक हो गई है।

आयोडीन युक्त नमक पर वैश्विक प्रतिबंध और भारत की विडंबना

यह जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन युक्त नमक को 40 साल पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों में यह प्रचलन में नहीं है। डेनमार्क की सरकार ने तो 1956 में ही आयोडीन युक्त नमक पर प्रतिबंध लगा दिया था। उनका अनुभव था कि 1940 से 1956 तक आयोडीन युक्त नमक के सेवन से अधिकांश लोग नपुंसक हो गए थे, और जनसंख्या इतनी कम हो गई थी कि देश के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था। उनके वैज्ञानिकों ने आयोडीन युक्त नमक को बंद करने की सलाह दी, जिसके बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

विडंबना यह है कि जब भारत में आयोडीन का यह ‘खेल’ शुरू हुआ, तो देश के कुछ ‘बेशर्म नेताओं’ ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत में बिक नहीं सकता। यह स्थिति कुछ समय पहले तक बनी रही, जब तक कि किसी ने कोर्ट में मुकदमा दायर कर इस प्रतिबंध को हटवाया।

समुद्री नमक के भयंकर नुकसान

आयुर्वेद के अनुसार, समुद्री नमक अपने आप में ही खतरनाक माना जाता है। कंपनियां इसमें ‘इंडस्ट्रियल आयोडीन’ मिला रही हैं, जो अत्यंत हानिकारक है। प्राकृतिक आयोडीन नमक में पहले से ही होता है, लेकिन औद्योगिक आयोडीन को अलग तरीके से संसाधित किया जाता है। यह समुद्री नमक, जो पहले से ही जोखिम भरा है, उसमें औद्योगिक आयोडीन मिलाकर पूरे देश को बेचा जा रहा है, जिससे कई गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। यह नमक मानव द्वारा फैक्ट्रियों में निर्मित है।

आम तौर पर उपयोग में लाया जाने वाला समुद्री नमक उच्च रक्तचाप (High BP), डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि यह नमक अम्लीय (acidic) होता है, जिससे रक्त की अम्लता बढ़ती है। रक्त की अम्लता बढ़ने से शरीर में 48 प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं। यह नमक पानी में पूरी तरह से नहीं घुलता और हीरे की तरह चमकता रहता है। इसी प्रकार, यह शरीर के अंदर भी पूरी तरह से नहीं घुल पाता और अंततः किडनी से भी बाहर नहीं निकल पाता, जिससे पथरी का भी कारण बन सकता है।
रिफाइंड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड होता है, जिसे शरीर एक बाहरी या हानिकारक पदार्थ के रूप में देखता है। यह शरीर में घुलता नहीं है। इस नमक में आयोडीन को बनाए रखने के लिए ट्राइकैल्शियम फॉस्फेट, मैग्नीशियम कार्बोनेट, सोडियम एल्यूमिनो सिलिकेट जैसे रसायन मिलाए जाते हैं, जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते हैं। विज्ञान के अनुसार, ये रसायन रक्त वाहिनियों को कठोर बनाते हैं, जिससे उनमें रुकावट आने और ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होती है। यह जोड़ों के दर्द, गठिया और प्रोस्टेट जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। आयोडीन युक्त नमक के सेवन से शरीर को अधिक पानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि एक ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह कोशिकाओं के पानी को कम करता है, जिससे हमें अधिक प्यास लगती है।

सही चुनाव: सेंधा नमक अपनाएं

यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक का सेवन बंद करें और उसकी जगह सेंधा नमक को अपने आहार में शामिल करें। केवल आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि सेंधा नमक में भी प्राकृतिक रूप से आयोडीन मौजूद होता है। इसके अलावा, आयोडीन हमें आलू, अरबी और अन्य हरी सब्जियों से भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है।

समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का उपयोग करना न केवल हमारे पारंपरिक ज्ञान और स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, बल्कि यह उन प्राकृतिक उत्पादों का समर्थन भी करता है जो प्रकृति द्वारा हमें दिए गए हैं। यह समय है कि हम इन तथ्यों को समझें और अपने स्वास्थ्य के लिए सही चुनाव करें।

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