
अं टार्कटिका की बर्फीली सतह पर अचानक एक विशालकाय गड्ढे के उभरने से दुनिया भर के वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया था। हरियाणा के आकार जितना बड़ा यह रहस्यमय गड्ढा, जो समुद्री बर्फ में बना था, कई दिनों तक वैज्ञानिकों के लिए गहरी चिंता का कारण बना रहा। इस घटना को पहली बार 1970 के दशक में देखा गया था, और 2017 में इसका फिर से दिखाई देना, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करता है।
वैज्ञानिकों ने अब इस ‘पोलिन्या’ नामक विशाल खाई के बनने के पीछे की असली वजह का पता लगा लिया है, और इसके संभावित दूरगामी परिणामों पर भी प्रकाश डाला है।
वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय: ‘पोलिन्या’ का रहस्य
कुदरत का करिश्मा वाकई अजीब होता है, और यह समय-समय पर इंसानों की परीक्षा लेता रहता है। अंटार्कटिका में वैज्ञानिकों को जो कुछ दिखा, उसने सचमुच उनके कलेजे को कंपा दिया। समुद्री बर्फ पर अचानक बने इस गड्ढे ने धीरे-धीरे फैलते हुए हरियाणा के जितना विशाल आकार ले लिया। यह घटना इतनी अप्रत्याशित थी कि इसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा और उन्हें इसकी असली वजह जानने के लिए मजबूर कर दिया।

‘माउड राइज’ और पोलिन्या: नासा की पहली नज़र
इस विशाल गड्ढे पर सबसे पहले नासा (NASA) के वैज्ञानिकों की नज़र पड़ी। यह गड्ढा ‘माउड राइज’ (Maud Rise) नाम के पठार के ठीक ऊपर दिखाई दिया और पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ था। इस खाई को ‘पोलिन्या’ (Polynya) नाम दिया गया। पोलिन्या समुद्री बर्फ में ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ बर्फ का आवरण टूट जाता है या पिघल जाता है और इसके नीचे खुला समुद्र दिखाई देने लगता है। ये समुद्री बर्फ में बने खुले इलाके होते हैं जहाँ बर्फ नहीं होती या बहुत कम होती है। यह क्षेत्र अक्सर तेज़ हवाओं, समुद्री धाराओं या ‘अपवेलिंग’ (Upwelling) के कारण बनता है, जहाँ समुद्र की गहरी परतों से ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी सतह पर आता है।
एकमैन परिवहन और उष्णकटिबंधीय तूफान: गड्ढे के बनने की वजह
हाल के शोध से पता चला है कि इस विशाल गड्ढे के निर्माण में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया एकमैन परिवहन (Ekman Transport) है। एकमैन परिवहन समुद्री धाराओं और हवाओं के कारण होने वाली पानी की गति को संदर्भित करता है, जो बर्फ को दूर धकेलती है और खुले पानी के क्षेत्र बनाती है।
सबसे महत्वपूर्ण खोज यह है कि इस पोलिन्या के लगातार खुले रहने में उष्णकटिबंधीय तूफान (Tropical Storms) एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। शोध में पाया गया है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ-साथ उष्णकटिबंधीय तूफान अधिक सामान्य हो गए हैं। ये तूफान अंटार्कटिक के इस क्षेत्र तक पहुंच कर अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे यह विशाल छेद बना रहता है। जब ये तूफान अंटार्कटिक तक पहुंचते हैं, तो वे तीव्र हवाएं उत्पन्न करते हैं जो समुद्री बर्फ को तोड़ देती हैं और खुले पानी के विशाल क्षेत्र को बनाए रखती हैं।
अतीत और वर्तमान: पोलिन्या हॉटस्पॉट का इतिहास
यह क्षेत्र, जहाँ यह विशाल गड्ढा देखा गया है, सबसे पहले 1974 और 1976 के बीच एक पोलिन्या हॉटस्पॉट के रूप में पहचाना गया था, जब एक बहुत बड़ा छेद दिखाई दिया था। उस समय भी इसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था। दशकों तक छिटपुट पोलिन्या घटनाओं के बाद, 2017 में, मौड राइज के ऊपर एक बड़ा छेद फिर से दिखाई दिया, जिसने नए सिरे से चिंता पैदा की और शोधकर्ताओं को इसकी गहराई से जांच करने के लिए प्रेरित किया।
क्या यह भविष्य के लिए चिंताजनक है?
समुद्री बर्फ में यह बड़ा गड्ढा कई हफ्तों तक खुला रहा, जिससे यह सवाल उठा कि ऐसा क्यों हो रहा है और क्या इससे धरती को भी कोई नुकसान पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य के लिए चिंताजनक हो सकती हैं।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव: पोलिन्या खुले समुद्री पानी के क्षेत्र
होते हैं, जो समुद्री जीवन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, खासकर सर्दियों में जब अधिकांश समुद्र बर्फ से ढका होता है। हालाँकि, इन विशाल और लगातार बने रहने वाले पोलिन्या का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी भी शोध का विषय है।
समुद्री धाराओं में परिवर्तन: पोलिन्या समुद्र की धाराओं और पानी के मिश्रण को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे गहरे समुद्र के पानी का सतह तक आना और सतह के पानी का नीचे जाना प्रभावित हो सकता है। यह महासागरों के परिसंचरण पैटर्न को बदल सकता है, जिसके वैश्विक जलवायु पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन का संकेतक: सबसे महत्वपूर्ण चिंता यह है कि इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना जलवायु परिवर्तन का एक स्पष्ट संकेत हो सकता है।
यदि उष्णकटिबंधीय तूफान, जो वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण अधिक तीव्र और लगातार हो रहे हैं, अंटार्कटिका में इस तरह के बड़े पोलिन्या को बनाए रखने में सक्षम हैं, तो यह वैश्विक जलवायु प्रणाली में बड़े बदलावों का संकेत है। समुद्री बर्फ का पिघलना और खुले पानी का बढ़ना पृथ्वी की ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि गहरा समुद्र सूर्य के प्रकाश को अधिक अवशोषित करता है बजाय चमकीली बर्फ के, जिससे और अधिक गर्मी पैदा होती है।
संक्षेप में, यह पोलिन्या एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन इसका बार-बार और बड़े पैमाने पर दिखाई देना, विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय तूफानों के प्रभाव में, वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है। यह घटना हमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और अधिक गंभीरता से लेने और इसके संभावित परिणामों को समझने के लिए प्रेरित करती है।

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