श्रम, संघर्ष और संवेदना का कथाकार: नारायण सिंह के निधन से कोयलांचल के सृजन पर लगा विराम
नारायण सिंह जैसे लेखक इस सृजनशील परिवेश की शुद्धतम मिसाल थे, जिन्होंने ‘कोयला संस्कृति’ की सामाजिक-आर्थिक क्रूरता के साथ उसकी मानवीयता को भी अभिव्यक्त किया और साहित्य के राष्ट्रव्यापी मंच…
संस्मरण: नामवर शताब्दी : आस्मां को ज़मीं पर जब उतरते देखा!
लेखक परिचय:- श्याम बिहारी श्यामल का जन्म 1965 में हुआ। वे लगभग तीन दशक से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं। उनका पहला चर्चित उपन्यास ‘धपेल’ 1998 में पलामू के…
फणीश्वर नाथ रेणु: हाशिये की आवाज़ और आज़ादी के अधूरे सपने का चितेरा
अपने शुरुआती जीवन में रेणु केवल एक लेखक नहीं थे, बल्कि एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया और भारत…
