धनबाद नगर निगम के आगामी चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां कई दिग्गज अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस चुनावी शोर के बीच के.के. इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक और क्षेत्र में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट एवं बीएड कॉलेजों की नींव रखने वाले प्रसिद्ध शिक्षाविद रवि चौधरी एक प्रमुख नाम बनकर उभरे हैं।
पेशे से इंजीनियर होने के नाते रवि चौधरी की छवि एक विजनरी नेतृत्वकर्ता की रही है, जो नगर विकास की एक स्पष्ट और आधुनिक परिकल्पना अपने साथ लेकर चल रहे हैं। नामांकन के दौरान उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दिया कि उनके पास धनबाद के कायाकल्प के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार है। उन्होंने सीधे तौर पर जनता की विवेकशीलता को संबोधित करते हुए कहा कि यदि मतदाताओं को लगता है कि एक उच्च शिक्षित व्यक्ति, जिसके पास शहर के विकास की ठोस प्लानिंग हो, उसे मेयर की कुर्सी मिलनी चाहिए, तो जनता उन्हें अवश्य मौका देगी।
वर्तमान में धनबाद गंभीर बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। पेयजल संकट, बढ़ता प्रदूषण, जर्जर सड़कें, लचर स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता के मोर्चे पर शहर की स्थिति बेहद चिंताजनक है। नगर निगम द्वारा यातायात सुधार के लिए बसों की खरीद की चर्चाएं तो बहुत हुईं, लेकिन वे आज भी सड़कों पर उतरने का इंतजार कर रही हैं। स्वच्छता रैंकिंग में भी धनबाद का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालातों में रवि चौधरी का ‘इंजीनियरिंग माइंडसेट’ और विकास का ठोस विजन जनता के लिए एक उम्मीद की किरण बन सकता है।
एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे चौधरी अपनी बौद्धिक क्षमता और कार्ययोजना से मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाएंगे, यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन उनके आने से चुनाव अब केवल वादों का नहीं, बल्कि ‘विजन और विज़डम’ का मुकाबला बन गया है, जो धनबाद की भविष्य की दशा और दिशा तय करेगा।

