(मुंबई से अमरनाथ की रिपोर्ट)
मुं बई के सांस्कृतिक केंद्र आराम नगर स्थित ‘वेदा ब्लैक बॉक्स’ में 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर रीवा की प्रतिष्ठित संस्था ‘नटरंग श्री कल्चरल फाउंडेशन’ द्वारा एक स्मरणीय साहित्यिक और नाटकीय संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने न केवल साहित्य प्रेमियों का दिल जीता, बल्कि रंगमंच की जीवंतता को भी नए आयाम दिए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हिंदी साहित्य की कालजयी रचना ‘मधुशाला’ का सामूहिक काव्य पाठ और इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित नाटक ‘घरवाली’ रहा।
शाम की शुरुआत हरिवंश राय बच्चन की सुप्रसिद्ध कृति ‘मधुशाला’ के ओजस्वी पाठ से हुई। जैसे ही कलाकारों ने “मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला” की पंक्तियों को स्वर दिया, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस काव्य पाठ की विशेषता यह थी कि इसमें सिनेमा और रंगमंच के दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। सिनेमा के मझे हुए कलाकार वचन पचहरा ने अपनी विशिष्ट शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ राहुल तिवारी, जो फिल्म निर्देशन और संपादन के साथ-साथ रंगमंच में भी सक्रिय हैं, ने काव्य की गहराइयों को बखूबी प्रस्तुत किया।

मंच पर नंदलाल सिंह, कैलाश चंद और पंकज कश्यप जैसे अनुभवी अभिनेताओं की उपस्थिति ने प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए। पृथ्वी थिएटर से लंबे समय से जुड़े अमित सिंह और वेद मानसिंह ने अपनी सधी हुई संवाद अदायगी से बच्चन जी की दार्शनिकता को जीवंत कर दिया। वहीं, सिनेमा जगत का जाना-माना चेहरा संजय वर्मा और टेलीविजन व फिल्म अभिनेता मुदस्सर खान ने भी अपनी सहभागिता से इस पाठ को यादगार बनाया। इस दौरान बाल कलाकार अर्जुन तिवारी ने अपनी मासूमियत और सहजता से सभी का ध्यान खींचा और दर्शकों का विशेष स्नेह प्राप्त किया। ‘मधुशाला’ के अंत में जब कलाकारों ने “अब न रहे वे पीने वाले, अब न रही वो मधुशाला” की पंक्तियाँ पढ़ीं, तो उपस्थित जनसमूह भावुक हो उठा।

साहित्यिक यात्रा के दूसरे चरण में प्रसिद्ध लेखिका इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित नाटक ‘घरवाली’ का मंचन किया गया। इस एकल नाटक को कृष्ण उपाध्याय ने अपने बेहतरीन अभिनय से प्रस्तुत किया। 45 मिनट की इस प्रस्तुति में कृष्ण उपाध्याय ने पात्र के अंतर्द्वंद्व और इस्मत चुगताई की लेखनी के तीखेपन को इतनी शिद्दत से उतारा कि दर्शक अपनी सीटों से बंधे रहे। नाटक की शुरुआत एंकर ज्योति जेलिया ने बेहद सहज और प्रभावी ढंग से की, जिससे दर्शकों और मंच के बीच एक सुंदर सेतु बन गया।
इस सफल आयोजन के पीछे निर्देशक चंद्रभान सिंह का कुशल मार्गदर्शन रहा, जिन्होंने साहित्य और अभिनय का बेहतरीन समन्वय सुनिश्चित किया। तकनीक और पर्दे के पीछे की टीम ने भी इस शाम को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सज्जात खान ने अपनी लाइट डिजाइन से मंच पर उचित वातावरण सृजित किया, जबकि बैकस्टेज की कमान राज संकलेश और गुंजन यादव ने बखूबी संभाली। खचाखच भरे वेदा ब्लैक बॉक्स में दर्शकों की निरंतर सराहना और तालियां इस बात का प्रमाण थीं कि नटरंग श्री कल्चरल फाउंडेशन अपनी कलात्मक यात्रा में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

