पटना। बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बजट पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने 3,47,589.76 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव रखा है। यह पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के 3,16,895.02 करोड़ रुपये के बजट से 30,694.74 करोड़ रुपये अधिक है, जो राज्य की बढ़ती आर्थिक मजबूती और विकास की गति को दर्शाता है।
आमदनी और खर्च का गणित: ‘एक रुपया’ कहां से आता है और कहां जाता है?
बजट के आंकड़ों को सरल भाषा में समझें तो सरकार की कमाई और खर्च का ढांचा इस प्रकार है:
कमाई के मुख्य स्रोत (प्रति रुपया)
केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा: 45.49 पैसे (सबसे बड़ा स्रोत)
राज्य के अपने कर: 18.92 पैसे
केंद्रीय सहायता अनुदान (सब्सिडी): 14.92 पैसे
लोक ऋण (लोन): 17.81 पैसे
गैर-कर राजस्व: 2.70 पैसे
ऋणों की वसूली: 0.15 पैसे
खर्च की प्राथमिकताएं (प्रति रुपया):
सामाजिक सेवाएं: 41.55 पैसे
(शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण पर सर्वाधिक ध्यान)
सामान्य सेवाएं: 28.12 पैसे
आर्थिक सेवाएं: 23.39 पैसे
लोक ऋण का भुगतान: 6.52 पैसे
ऋण और पेशगियां: 0.41 पैसे
सहायता अनुदान: 0.01 पैसा
सात निश्चय-3 और विकास की रूपरेखा
सरकार ने ‘सुशासन के कार्यक्रम
2025-30′ के तहत ‘विकसित बिहार के सात निश्चय-3’ को अमलीजामा पहनाने के लिए बजट में 14,800 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। वार्षिक स्कीम का कुल बजट अनुमान 1,22,155.42 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय (वेतन, पेंशन आदि) के लिए 2,25,434.34 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
22 वर्षों में 14 गुना बढ़ा बजट का आकार
बिहार की आर्थिक प्रगति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2004-05 में राज्य का कुल बजट मात्र 23,885 करोड़ रुपये था, जो आज 2026-27 में बढ़कर 3,47,589 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इसे ‘भविष्योन्मुखी और समावेशी’ बजट बताते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय के साथ विकास के प्रति सरकार की ईमानदारी को दर्शाता है।
यह बजट न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला है, बल्कि इसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को भी केंद्र में रखा गया है।

