artisan selection travel stories escort listings exclusive offers official site ceramic mugs home decor travel stories storefront adult services local directory home decor online store urban lifestyle escort listings best deals best deals product catalog home decor official site escort listings urban lifestyle local directory ceramic mugs storefront adult services creative works best deals shop now product catalog escort listings local directory buy online urban lifestyle handmade gifts product catalog official site shop now escort listings exclusive offers online store ceramic mugs premium collection travel stories escort listings exclusive offers exclusive offers storefront local directory online store home decor city guide exclusive offers adult services urban lifestyle creative works travel stories home decor local directory home decor
  • Thu. Feb 12th, 2026

AVN Antarkatha

क्रांति के अग्रदूत बाबा तिलका माँझी को संजीव सिंह ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि; धनबाद के सर्वांगीण विकास का लिया संकल्प

ByBinod Anand

Feb 11, 2026

धनबाद, 12 फरवरी 2026:

कोयलांचल की धरती एक बार फिर महान बलिदानियों की याद में गर्व से भर उठी। धनबाद के सरायढेला गोल बिल्डिंग स्थित बाबा तिलका माँझी चौक पर बुधवार को उस समय उत्साह का माहौल दिखा, जब मेयर प्रत्याशी और झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बाबा तिलका माँझी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

​इस अवसर पर बाबा तिलका माँझी स्मारक समिति ने संजीव सिंह का भव्य और आत्मीय स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक उल्लास के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने वीर सेनानी के प्रति श्रद्धा और समाज के प्रति सेवा के संकल्प को और मजबूती दी।

स्वतंत्रता आंदोलन के प्रथम नायक को नमन

​पुष्पांजलि अर्पित करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित करते हुए संजीव सिंह ने कहा कि बाबा तिलका माँझी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के वे पहले नक्षत्र थे, जिन्होंने अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ सबसे पहले संगठित होकर तीर-धनुष उठाया था।

“बाबा तिलका माँझी जी का अदम्य साहस, संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान केवल आदिवासी समाज के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे देशवासियों के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत है। उन्होंने उस समय अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं जब देश में विद्रोह की आहट भी शुरू नहीं हुई थी। आज हम उनकी बदौलत आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।”

स्मारक समिति का गर्मजोशी भरा स्वागत

​कार्यक्रम के दौरान बाबा तिलका माँझी स्मारक समिति के पदाधिकारियों ने संजीव सिंह को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। संजीव सिंह ने समिति के इस स्नेह के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि ऐसी समितियां ही हमारे पुरखों की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सेतु हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि महापुरुषों के स्मारकों के सौंदर्यीकरण और उनके सम्मान को बनाए रखने के लिए वह हमेशा तत्पर रहेंगे।

विकास का ‘संजीव’ विजन: “अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे रोशनी”

​श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए संजीव सिंह ने धनबाद की नगर निगम व्यवस्था और अपने भावी विजन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि धनबाद केवल कोयले की राजधानी नहीं है, बल्कि यह वीरों और शहीदों की कर्मभूमि है।

उनके संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • समाज का उत्थान: विकास का असली अर्थ तब है जब समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं की रोशनी पहुँचे।
  • स्वच्छता और व्यवस्था: धनबाद नगर निगम को कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के मामले में देश के अग्रणी शहरों में शामिल करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
  • नागरिक सम्मान: शहर के प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन, बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल और सुव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम उपलब्ध कराना उनका लक्ष्य है।
  • युवाओं को अवसर: खेल और संस्कृति के माध्यम से स्थानीय युवाओं को मंच प्रदान करने के लिए वह प्रतिबद्ध हैं।

जनसमूह का उमड़ा सैलाब

​इस गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी बनने के लिए सरायढेला और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, स्मारक समिति के सदस्य और संजीव सिंह के समर्थक जुटे। लोगों के उत्साह को देखकर स्पष्ट था कि जनता अपने ऐतिहासिक नायकों और उनके आदर्शों पर चलने वाले नेतृत्व के प्रति गहरी आस्था रखती है।

​कार्यक्रम में मुख्य रूप से स्मारक समिति के अध्यक्ष, सचिव सहित कई गणमान्य व्यक्ति और समाजसेवी उपस्थित थे। पूरे परिसर में ‘बाबा तिलका माँझी अमर रहे’ के नारों से वातावरण गूँज उठा।

 विरासत और विकास का संगम

​संजीव सिंह का बाबा तिलका माँझी चौक पर यह माल्यार्पण केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धनबाद की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का एक प्रयास दिखा। जहाँ एक ओर उन्होंने इतिहास के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की, वहीं दूसरी ओर भविष्य के धनबाद के लिए अपना रोडमैप भी जनता के सामने रखा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *