रांची/रामगढ़: झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा इलाके से 2 जनवरी को लापता हुए दो मासूम भाई-बहन, अंश और अंशिका को पुलिस ने 13 दिनों के बाद रामगढ़ जिले के चितरपुर से सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने एक युवक और एक युवती को गिरफ्तार किया है। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इन बच्चों को बिहार ले जाकर बेचने की योजना थी।
किराएदार बनकर छिपे थे आरोपी
गिरफ्तार आरोपी, जिनकी उम्र लगभग 25 और 19 वर्ष है, बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। अपहरण के बाद दोनों बच्चों को लेकर वे रामगढ़ के चितरपुर स्थित अहमदनगर (पहाड़ी) इलाके में आ गए थे। वहां उन्होंने खुद को पति-पत्नी बताकर एक महिला, रोशन आरा, से 1000 रुपये महीने पर कमरा किराए पर लिया। मकान मालकिन को शक न हो, इसलिए उन्होंने बच्चों को अपना ही बताया था। ठंड और कम उम्र का हवाला देकर उन्होंने इंसानियत के नाते वहां शरण ली थी।
बैलून बेचने के बहाने की थी रेकी
पुलिस जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई कि आरोपी युवक-युवती धुर्वा के शालीमार बाजार और आसपास के क्षेत्रों में घूम-घूमकर गुब्बारे (बैलून) बेचते थे। इसी दौरान उन्होंने अंश और अंशिका पर नजर रखी और मौका पाकर उनका अपहरण कर लिया। उनका असली मकसद बच्चों को बिहार के औरंगाबाद ले जाकर बेचना था, लेकिन पुलिस की सख्ती और कड़े पहरे के कारण वे बिहार नहीं निकल पा रहे थे और 10-11 दिनों से रामगढ़ में ही छिपे हुए थे।
बजरंग दल और पुलिस की सतर्कता से मिली सफलता
बच्चों की बरामदगी में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही। सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें वायरल होने के बाद बजरंग दल की टीम (सचिन, डब्लू साहू, सुनील और अंशु) सक्रिय हो गई थी। बुधवार तड़के उन्हें चितरपुर में संदिग्धों की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने बच्चों को पहचान लिया और तुरंत रामगढ़ पुलिस को सूचित किया।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही रजरप्पा थाना पुलिस ने मौके पर दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बच्चों को फिलहाल सुरक्षित बचा लिया गया है और आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के अन्य संपर्कों का पता लगाया जा सके।
