“हम वर्षों तक कंपनी की सेवा करने के बाद आज अपने ही हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं। यदि हमारी विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो हमारे पास चरणबद्ध आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।” – संजय राणा, पूर्व अध्यक्ष, CMOAI (ईसीएल शाखा)
ध नबाद/आसनसोल: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी अनुषंगी कंपनियों (ECL, BCCL आदि) से सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों में प्रबंधन की नीतियों को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगों और चिकित्सा संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
कोल माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMOAI), ईसीएल शाखा के पूर्व अध्यक्ष संजय राणा ने इस गंभीर स्थिति पर प्रकाश डालते हुए प्रबंधन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए हैं।
मेडिकल बिलों के भुगतान में भारी विलंब और भेदभाव
सेवानिवृत्त अधिकारियों की सबसे प्रमुख समस्या मेडिकल बिलों के भुगतान में होने वाली अत्यधिक देरी है। जानकारी के अनुसार, विभाग की शिथिलता का आलम यह है कि एक सेवानिवृत्त अधिकारी को अपने इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्राप्त करने के लिए कोल इंडिया मुख्यालय में 3 महीने और ईसीएल या बीसीसीएल जैसी अनुषंगी कंपनियों में 6 महीने तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
हैरानी की बात यह है कि जहाँ अधिकारियों के मेडिकल बिल महीनों लंबित रहते हैं, वहीं ठेकेदारों के मेडिकल बिलों का भुगतान महज एक महीने के भीतर कर दिया जाता है।
इस भेदभावपूर्ण व्यवहार से पूर्व अधिकारियों में काफी अपमान और असुरक्षा की भावना है।
प्रमुख मांगें और विसंगतियां
सेवानिवृत्त अधिकारियों ने प्रबंधन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे रखे हैं:
मेडिकल सीमा में वृद्धि: वर्तमान में मेडिकल बिल की सीमा 25 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने की मांग वर्षों से लंबित है। केंद्र सरकार द्वारा CGHS दरों में वृद्धि किए जाने के कारण अस्पतालों का खर्च काफी बढ़ गया है, जिससे वर्तमान सीमा नाकाफी साबित हो रही है।
पेंशन की अल्प राशि:10-15 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों की पेंशन काफी कम है। ऊपर से मेडिकल खर्च की अनुशंसित राशि (Reimbursable amount) को भी कम या खत्म कर दिया गया है, जिससे बुजुर्ग अधिकारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
अस्पतालों में उपेक्षा: सूचीबद्ध (Empaneled) अस्पतालों में सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए जो बेड श्रेणी अधिकृत है, उन्हें वह आवंटित नहीं की जाती। इसके अलावा, आज तक इन अधिकारियों को मेडिकल स्मार्ट कार्ड जारी नहीं किए गए हैं, जिससे कैशलेस इलाज और पहचान में भारी दिक्कतें आती हैं।
आंदोलन की रूपरेखा
अपनी इन समस्याओं को लेकर सेवानिवृत्त अधिकारियों का संगठन जल्द ही कोल इंडिया के निदेशक (कार्मिक/DP) से मुलाकात करेगा और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रबंधन स्तर पर वार्ता विफल रहती है, तो वे सीधे कोयला मंत्री के समक्ष अपनी गुहार लगाएंगे।
प्रबंधन की बेरुखी ने अब इन अधिकारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। अब देखना यह है कि कोल इंडिया प्रशासन इन वरिष्ठ नागरिकों की सुध लेता है या विवाद और गहराता है।

