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लालू यादव की दो आरजेडी बिहार में अलग राजनीति,झारखण्ड में अलग नीति।

Byadmin

Dec 24, 2021
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लगता है लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल अब दो राजद बन गई है. बिहार के लिए उसकी अलग नीति है और झारखंड के लिए अलग. फिलहाल महीनों से झारखंड में राष्ट्रीय जनता दल के एक भी पदाधिकारी नहीं है, क्योंकि सभी पदों को भंग कर दिया गया है।

लालू यादव वाली राष्ट्रीय जनता दल अब 2 राजद बन गई है. बिहार के लिए एक राजद और दूसरे राज्यों के लिए दूसरा राजद. बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के लिए एक नीति और दूसरे राज्यों के लिए राष्ट्रीय जनता दल की अलग नीति और इसी राजनीति के ताने-बाने के बीच झारखंड राजद अपने लिए निगहबानी की राह देख रही है. झारखंड में राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति कर रहे लोगों को अब इस बात का डर सताने लगा है कि बिहार के लिए जो राजनीति राजद बनाती है वह झारखंड के लिए इतनी मजबूती से लागू नहीं कर पा रही है और यही वजह है कि झारखंड में सभी पदों के भंग होने के बाद अब महीनों बीत चुके हैं लेकिन राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से इस पर कोई बड़ा निर्णय होता नहीं दिख रहा है. लालू बीमार हैं, तेजस्वी की शादी हो गई है, तेज प्रताप नाराज चल रहे हैं यह सब कुछ बिहार में हो रहा है लेकिन झारखंड में बस इंतजार।

2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव के समय में इस बात को लेकर के सबसे ज्यादा रस्साकशी शुरू हुई थी कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जिस चुनाव को बीजेपी के विरोध में लड़ा जाना है उसमें कौन-कौन लोग साथ होंगे. हेमंत सोरेन का सबसे ज्यादा मजबूत आधार था इसलिए मुख्यमंत्री का चेहरा वही होंगे. जिस महागठबंधन को झारखंड में बनाया गया उसके नेता भी हेमंत सोरेन चुन लिए गए. कांग्रेस 1989 के बाद बिहार झारखंड में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के पीछे की ही राजनीति कर रही है. ऐसे में कांग्रेस मुखर होकर के भी हेमंत सोरेन के आगे नहीं जा पाई. सीट बंटवारे को लेकर के राजद और हेमंत के बीच जिच जरूर कायम हुई. हेमंत सोरेन और राष्ट्रीय जनता दल के बीच समझौते की भी बात चली और पूरे राष्ट्रीय जनता दल की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव का कई बार झारखंड का दौरा भी हुआ. यह अलग बात है कि 2019 में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव चारा घोटाले मामले में रांची के जेल में ही थे इसलिए बहुत सारी नीतियां वहां से भी बन गई. हालांकि सरकारी विरोध और विभेद भी इस तरीके का भी रहा कि वहां पर कई नेता रात में जाकर लालू से मिलते हैं, लेकिन दिन के उजाले के लिए होने वाली राजनीति में एक समझौता हो गया राष्ट्रीय जनता दल और हेमंत सोरेन ने साथ मिलकर चुनाव लड़ लिया और जब सरकार बनी तो उसमें राष्ट्रीय जनता दल की हिस्सेदारी भी एक मंत्री के तौर पर हो गई ।

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