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मध्य्प्रदेश:बहुचर्चित मयूर बोकड़िया हत्याकांड में दोषी को आजीवन कारावास

Byadmin

Dec 28, 2021
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मयूर अपने ससुराल चित्तौड़गढ़ से वापस लौटा था। रात करीब आठ बजे दादाबाड़ी स्थित अपने ऑफिस से लौट रहा था। उसके घर से करीब 100 फीट दूर मुबारिक छीपा के खाली प्लाट से अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर गवाह मौके पर पहुंचे थे। मयूर को गोली लगने पर अस्पताल ले गए थे जहां उसे मृत घोषित कर दिया था। मयूर के पिता अशोक कुमार ने गवाही में बताया था कि उसका लड़का मयूर स्कूटर पर बैठा हुआ था और दानिश बाइक पर था। दोनों बातचीत कर रहे थे तभी घूमते-घूमते गोली चलने की आवाज सुनी थी। उसने देखा कि उसका लड़का नीचे गिरा हुआ है और चेहरे पर आंख के नीचे गोली लगी थी।

 

धार। बहुचर्चित मयूर बोकड़िया हत्याकांड के एक आरोपित दानिश पुत्र रियाज शाह उर्फ बल्लू बैटरी निवासी काजीपुरा बदनावर को अतिरिक्त अपर सत्र न्यायाधीश रश्मिना चतुर्वेदी के न्यायालय में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है जबकि दूसरे आरोपित अमजद पुत्र मकमुद्दीन खान निवासी सदर बाजार गंधवानी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया गया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 10 मार्च 2018 की रात 8ः50 बजे बदनावर की महावीर कॉलोनी की है। जहां मुबारिक छीपा के मकान के सामने मयूर पुत्र अशोककुमार बोकड़िया की अभियुक्त दानिश ने देसी पिस्टल से गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर तफ्तीश के दौरान आरोपित दानिश को 15 मार्च 2018 को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ के आधार पर अभियुक्त अमजद को गिरफ्तार कर उससे अभियुक्त दानिश द्वारा उपयोग की गई पिस्टल जब्त की गई थी।

गवाहों के अनुसार घटना दिनांक को ही मयूर अपने ससुराल चित्तौड़गढ़ से वापस लौटा था। रात करीब आठ बजे दादाबाड़ी स्थित अपने ऑफिस से लौट रहा था। उसके घर से करीब 100 फीट दूर मुबारिक छीपा के खाली प्लाट से अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर गवाह मौके पर पहुंचे थे। मयूर को गोली लगने पर अस्पताल ले गए थे जहां उसे मृत घोषित कर दिया था। मयूर के पिता अशोक कुमार ने गवाही में बताया था कि उसका लड़का मयूर स्कूटर पर बैठा हुआ था और दानिश बाइक पर था। दोनों बातचीत कर रहे थे तभी घूमते-घूमते गोली चलने की आवाज सुनी थी। उसने देखा कि उसका लड़का नीचे गिरा हुआ है और चेहरे पर आंख के नीचे गोली लगी थी।

न्यायाधीश ने निर्णय में लिखा कि प्रकरण में साक्ष्‌य आधारित तथ्यात्मक, विधिक विवेचन व विश्लेषण के परिप्रेक्ष्‌य में अभियोजन पक्ष संदेह से परे प्रमाणित करने में पूर्णत सफल रहा है कि अभियुक्त दानिश ने घटना दिनांक को मयूर की सआशय मृत्यु कारित करने के आशय से देसी पिस्टल से गोली मारकर हत्या की। यह भी अभिलेख पर आई साक्ष्‌य से प्रमाणित है कि अभियुक्त अमजद ने अपने आधिपत्य में आग्नेय आयुध यथा देशी पिस्टल बिना वैध अनुज्ञप्ति के रखी। दोनों अभियुक्त अपराध में दोष सिद्ध पाए जाने पर उन्हें अलग-अलग कारावास की सजा दी गई। अभियोजन पक्ष की ओर से एजीपी भानुप्रतापसिंह पंवार एवं अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता निसार एहमद ने पैरवी की।

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