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झारखंड के उन महापुरुषों के जीवन का पुनर्मूल्यांकन हो जिसपर इतिहास मौन है..!

Byadmin

Oct 24, 2021
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विनोद आनंद

बिरसा मुंड ने वनवासियों और आदिवासियों को एकजुट कर उन्हें अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करने के लिए तैयार किया था. इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय संस्कृति की रक्षा करने के लिए धर्मान्तरण करने वाले ईसाई मिशनरियों का भी विरोध किया था. … बिरसा मुंडा धर्मान्तरण, शोषण और अन्याय के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का संचालन करने वाले महान सेनानायक थे।जिसके कारण उन्हें अपने जीवन से भी हाथ धोना पड़ा।उन्होंने मौत को अंगीकार किया लेकिन कभी भी अपनी सोच, संस्कार और संघर्ष से समझौता नही किया।

बिरसा मुंडा के तरह झारखंड के ऐसे कई महापुरुष हुए जिन्होंने झारखंड की अस्मिता,वनवासियों के गौरवशाली परम्पराएं और अपनी विरासत के लिए संघर्ष किया।देश की स्वाधीनता आंदोलन और विदेशी आक्रांताओं को मुंह तोड़ जवाब दिया। अपनी अस्मिता और अपने सिद्धांतों के लिए कभी भी उन्होंने घुटना नही टेका।और अत्याचारियों का विरोध करते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए।

उनकी इन महान उपलब्धियों पर आज इतिहास भले हीं मौन है लेकिन दंत कथाओं, यहां के लोक गीतों और किंबन्दतियों में उनके उस महान बलिदान की गाथा आज भी जिंदा है।

माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी,और राज्य के युवा यशस्वी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन जी को ऐसे महापुरुषों के जीवन को पुनर्मूल्यांकन और उस पर शोध करने पर ध्यान देकर समाज और देश के सामने लाना चाहिए। ताकि आज की पीढ़ी के सामने उन महान विभूतियों को हमेशा जिंदा रखा जा सके।

माननीय मोदी जी द्वारा झारखंड के गौरव भगवान बिरसा के जीवन और उनके महान बलिदान को पूरे देश के लिए प्रेरणास्पद बताए जाने और उस गौरवशाली व्यक्तित्व का जिक्र कर पूरे देश के सामने लाने के लिए उनका आभार है। पर झारखंड के उस महान सपूतों के जीवन, उपलब्धि, संघर्ष और वलिदान की गाथा को सामने लाने का प्रयास होना चाहिए जिस पर इतिहास मौन है ।

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