• Tue. Jul 23rd, 2024

झरिया कोयलांचल मे उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा तुलसी विवाह पूजन पर्व

Byadmin

Nov 15, 2021
Please share this News

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम और माता तुलसी के मिलन का पर्व तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है. इस साल आज यानी रविवार, 14 नवंबर को तुलसी शालिग्राम विवाह है। पूरे झरिया कोयलांचल मे यह पर्व मनाया जा रहा है। झरिया के कई घरों मे श्रद्धालुओं द्वारा पूरे हिन्दू विधि विधान से लोगों द्वारा इस पूजन को किया जा रहा है। पद्मपुराण के पौराणिक कथा अनुसार राजा जालंधर की पत्नी वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर बन गए थे, जिस कारणवश प्रभु को शालिग्राम भी कहा जाता है और भक्तगण इस रूप में भी उनकी पूजा करते हैं. इसी श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु को अपने शालिग्राम स्वरुप में तुलसी से विवाह करना पड़ा था और उसी समय से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी विवाह का उत्सव मनाया जाता है। देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन मनाए जाने वाले इस मांगलिक प्रसंग के सुअवसर पर सनातन धर्मावलम्बी घर की साफ-सफाई करते हैं और रंगोली सजाते हैं. शाम के समय तुलसी चौरा के पास गन्ने का भव्य मंडप बनाकर उसमें साक्षात् नारायण स्वरुप शालिग्राम की मूर्ति रखते हैं और फिर विधि-विधानपूर्वक उनके विवाह को संपन्न कराते हैं।मंडप, वर पूजा, कन्यादान, हवन और फिर प्रीतिभोज, सब कुछ पारम्परिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया जाता है. इस विवाह में शालिग्राम वर और तुलसी कन्या की भूमिका में होती है. यह सारा आयोजन यजमान सपत्नीक मिलकर करते हैं. इस दिन तुलसी के पौधे को यानी लड़की को लाल चुनरी-ओढ़नी ओढ़ाई जाती है. तुलसी विवाह में सोलह श्रृंगार के सभी सामान चढ़ावे के लिए रखे जाते हैं. शालिग्राम को दोनों हाथों में लेकर यजमान लड़के के रूप में यानी भगवान विष्णु के रूप में और यजमान की पत्नी तुलसी के पौधे को दोनों हाथों में लेकर अग्नि के फेरे लेते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *