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आज चैती छठ महापर्व है आइए जानते है , नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य की तिथि और शुभ मुहूर्त 

ByAdmin Office

Apr 12, 2024
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*12 अप्रैल दिन शुक्रवार 2024*

 

हिंदू धर्म में चैती छठ महापर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। प्रथम चैत्र माह में और द्वितीय कार्तिक माह में। हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को विधिवत छठ का पावन पर्व मनाते हैं। विशेष तौर पर कार्तिक मास के छठ पर्व का बहुत अधिक महत्व है।

 

लेकिन इस छठ को भी लोग बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं। इस व्रत की शुरुआत नहाए खाए के साथ होती है। इसके पश्चात निरंतर 36 घंटे तक निर्जला व्रत महिलाएँ रखती है, फिर भगवान सूर्य देव को जल का अर्घ्य देने के पश्चात अपना व्रत खोलती है। आइए विस्तारपूर्वक जानते हैं चैती छठ का महत्व और तिथियाँ।

 

*चैती छठ 2024 की तारीख*

 

हिंदू पंचांग के मुताबिक चैती छठ का पावन पर्व 12 से 15 अप्रैल के मध्य में मनाया जाएगा। इसका शुरुआत विधिवत नहाए खाए के साथ होगी।

 

*12 अप्रैल दिन शुक्रवार 2024 – नहाए खाए*

 

*13 अप्रैल दिन शनिवार 2024- खरना*

 

*14 अप्रैल दिन रविवार 2024- संध्या अर्घ्य*

 

*15 अप्रैल दिन सोमवार 2024- प्रातः काल अर्घ्य तथा पारण*

 

*नहाए खाए*

 

पंचांग के मुताबिक चैत्र मास की चतुर्थी तिथि से चैती छठ प्रारंभ हो जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के पश्चात महिलाएँ भगवान सूर्य देव की विधि विधान से पूजा अर्चना करती हैं। इस दिन शुद्ध शाकाहारी भोजन का सेवन करते हैं।

 

*खरना*

 

चैती छठ के द्वितीय दिवस को खरना के नाम से जाना जाता है। इस दिन से महिलाएँ निरंतर 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं। इसके साथ ही भगवान सूर्य को भोग लगाने हेतु प्रसादी बनाते हैं। इसके पश्चात शाम में पीतल या मिट्टी के बर्तन में गुड़ की खीर तथा ठेकुआ आदि बनाते हैं। इसके लिए नए चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पश्चात भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महिलाएँ प्रसादी ग्रहण करती हैं।

 

*डूबते सूर्य को अर्घ्य*

 

छठ के पावन पर्व के तृतीय दिवस में भगवान सूर्य को अर्घ देने का विशेष विधान है। शाम के समय महिलाएँ डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जल तथा दूध का इस्तेमाल करती है।

 

*उगते हुए सूर्य को अर्घ्य*

 

इस दिन सूर्योदय के दौरान महिलाएँ भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं। इसके साथ ही छठी मैया से संतान तथा संपूर्ण परिवार की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। तत्पश्चात् व्रत का पारण करते हैं।

 

*नोट:* यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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