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आग और भूधंसान प्रभावित रैयतों को चार गुणा मुआवजा देने पर हो रहा विचार,ऑनलाइन बैठक में हुई चर्चा

Byadmin

Oct 7, 2021
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धनबाद: सालों से स्पष्ट मुआवजा नीति नहीं हाेने से झरिया अग्निप्रभावितों का पुर्नवासन नहीें हो पा रहा है। लेकिन अब प्रधानमंत्री कार्यालय के इस मामले में दखल देने के बाद काेयला मंत्रालय इसको लेकर गंभीरता दिखाते हुए पूरे मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने की अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहा है।इस क्रम में बुधवार को मंत्रालय की हुई आनलाइन बैठक में झरिया अग्निप्रभावित इलाके के विकास और वहां बसे लोगों के पुर्नवासन चर्चा हुई। जिसमें कई सुझाव आए। इसके जमीन मालिकों को उनके जमीन के बदले दिए जानेवाले मआवजा पर भी कुछेक सुझाव दिए गए। जिसमें यह था कि रैयतों को उनकीे जमीन के बाजार दर से चार गुणा दर पर मुआवजा दिया जाए। इस प्रस्ताव पर बैठक की अध्यक्षता कर रहे मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बी के तिवारी ने इस प्रसताव पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
गौरतलब है कि झरिया मास्टर प्लान को हाल के दिनों में कोयला मंत्रालय ने काफी गंभीरता दिखाई और एक के बाद एक चार कमिटियों का गठन किया। अलग अलग मुद्दों को लेकर गठित इन समितियों ने धनबाद का पिछले महीने दौरा कर झरिया विकास और पुर्नवास को लेकर कई आंकडें एकत्रित की थी। इन दौरों के बाद मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की यह पहली बैठक थी। जिसकी अध्यक्षता कोयला सचिव अनिल कुमार को करना था। लेकिन उनके अनुपस्थित होने के कारण तिवारी ने समीक्षा की।
रैयतों की जमीन के मुआवजे के लिए कमिटी ने भारत सरकार की नई मुआवजा नीति, लैंड एक्वीजीशन रिहैब्लिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013 को आधार बनाया। इस एक्ट के अनुसार ग्रामीण इलाकों में जमीन की बाजार दर से चार गुणा मुआवजा देने का प्रावधान है।एनएफ. इस बैठक में बीसीसीएल का भी एक प्रतिनिधि मंडल इसमें शामिल हुआ। जिसने कई जानकारियां देने के अलावा कई अन्य सुझाव भी दिए। प्रतिनिधियों ने चिन्हित कुल 595 जगहों में अधिकांश जगहों पर आग पर काबू पाए जाने की भी जानकारी बैठक के दौरान मंत्रालय के अधिकारियों को दी।

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